Holi 2026: होली का त्योहार हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। भारत में पंचांग और ग्रह-नक्षत्र के मुताबिक इसकी तिथि तय की जाती है, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी हिंदू समुदाय चंद्र कैलेंडर के आधार पर ही होली मनाई जाती है। इस साल लोगों के बीच थोड़ी उलझन है कि होली 2 मार्च को होगी या 3 मार्च को। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में होली कब और कैसे मनाई जाती है।
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होली की तिथि और मुहूर्त का आधार
आपको बता दें कि, होली मुख्य रूप से पूर्णिमा की रात को मनाई जाती है। फाल्गुन पूर्णिमा के अनुसार तिथि की शुरुआक और समाप्ति का समय अलग-अलग स्थानों पर अलग होता है। इस साल पूर्णिमा 2 मार्च को शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी। हालांकि, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण को प्रभाव होने के कारण कुछ क्षेत्रों में रंगो की होली 4 मार्च को खेली जाएगी। पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी हिंदू धर्म के अनुयायी पूर्णिमा और सूर्यास्त के समय के आधार पर होलिका दहन का मुहूर्त निकालते हैं। मंदिर और स्थानीय धार्मिक संगठन समय देखकर त्योहार मनाने की योजना बनाते हैं।
पाकिस्तान में होली का आयोजन

पाकिस्तान में होली मुख्य रूप से सिंध प्रांत में मनाई जाती है। इस साल होलिका दहन 3 मार्च की शाम को होगा, जबकि रंगों का उत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा। पाकिस्तान के सबसे बड़े होली आयोजन कराची में होते हैं, खासकर श्री स्वामीनारायण मंदिर में। होली के दिन भजन-कीर्तन, सामूहिक भोजन और रंगों के खेल का आयोजन किया जाता है। सिंध के मीठी शहर को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा लाहौर, रावलपिंडी और मुल्तान जैसे शहरों में भी छोटे स्तर पर होली मनाई जाती है। मुल्तान का ऐतिहासिक मंदिर Prahladpuri Temple प्रहलाद की कथा से जुड़ा हुआ है और यहां भी श्रद्धालु होली उत्सव में शामिल होते हैं।
बांग्लादेश में होली: डोल पूर्णिमा

बांग्लादेश में होली को ‘डोल पूर्णिमा’ या ‘डोल यात्रा’ कहा जाता है। यहां भी होलिका दहन 3 मार्च की शाम को और रंगों का उत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा। ढाका की इस्कॉन ढाका और ढाकेश्वरी नेशनल टेंपल में विशेष पूजा-कीर्तन और रंगों का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। श्रद्धालु राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को झूले पर विराजमान कर गीत गाते हैं और गुलाल अर्पित करते हैं। इसके अलावा चिटगांव और सिलहट जैसे शहरों में भी समुदाय स्तर पर होली मनाई जाती है।
मुहूर्त निकालने की प्रक्रिया
पाकिस्तान और बांग्लादेश में होली का मुहूर्त सूर्यास्त के बाद पूर्णिमा तिथि और भद्रकाल देखकर तय किया जाता है। मंदिर और स्थानीय धर्मगुरु तिथि और समय के अनुसार होलिका दहन का समय घोषित करते हैं। इस तरह पूरी तरह से धार्मिक परंपरा और ज्योतिषीय गणना का पालन करते हुए होली मनाई जाती है।
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