Holi 2026: आज यानी 21 फरवरी दिन शनिवार को मथुरा के महावन क्षेत्र में स्थित रमणरेती आश्रम में भव्य होली का आयोजन किया जा रहा है। बृज क्षेत्र की होली अपनी अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। खासकर मथुरा और गोकुल में होली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि 40 दिनों तक चलने वाली महापरंपरा है। इस दौरान संत और भक्त मिलकर कृष्ण लीला का आनंद लेते हैं और रंग, फूल, गुलाल और अबीर से त्योहार की रंगत बढ़ाते हैं।
रमणरेती आश्रम में होली का आयोजन गुरुशरणानंद जी महाराज के नेतृत्व में होता है। यहां संत, भक्त और देश-विदेश से आए श्रद्धालु होली में शामिल होकर फूलों और प्राकृतिक रंगों से खेलते हैं। होली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह फूलों और प्राकृतिक रंगों के साथ खेली जाती है, जिससे शरीर और स्वास्थ्य पर कोई नुकसान नहीं होता।
होलाष्टक के दौरान इन राशियों पर बढ़ सकता है संकट, बरतें सतर्कता
फूलों और प्राकृतिक रंगों की होली

इस वर्ष रमणरेती आश्रम में होली के लिए 6 कुंतल फूल, 6 कुंतल गुलाल, 1000 लीटर टिशु का रंग, 2 किलो चंदन, अबीर और 100 ग्राम केसर का उपयोग किया जाएगा। भक्त इन रंगों और फूलों के साथ राधा-कृष्ण की रासलीला और कृष्ण लीला का आनंद लेंगे। टेसू के फूलों से खेली जाने वाली होली की खासियत यह है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है।
भक्तों का उत्साह इस त्योहार को और जीवंत बना देता है। फूलों की खुशबू और रंग-बिरंगी गुलाल से आश्रम का वातावरण एक दिव्य अनुभव प्रदान करता है। इस मौके पर भक्त और संत होली के रसिया गायन और नृत्य के माध्यम से कृष्ण भक्ति में पूरी तरह डूब जाते हैं।
देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु
रमणरेती आश्रम में होली का आयोजन केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर होली का आनंद लेते हैं। विशेष रूप से विदेशी पर्यटक और भक्त इस होली को देखने और अनुभव करने आते हैं। होली में भाग लेने वाले सभी लोग संतों के मार्गदर्शन में टेसू के फूल और प्राकृतिक रंगों से खेलते हैं, जिससे उत्सव और भी जीवंत और सुरक्षित बनता है।
आयोजन का महत्व
रमणरेती आश्रम की होली न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति सजगता का संदेश भी देती है। प्राकृतिक फूलों और रंगों का इस्तेमाल होली को पारंपरिक, रंगीन और स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। भक्तों का यह उत्साह और श्रद्धा इस त्योहार को अद्वितीय और अविस्मरणीय अनुभव बनाती है।
इस प्रकार, 21 फरवरी को रमणरेती आश्रम में होने वाली होली 6 कुंतल फूल और गुलाल, प्राकृतिक रंगों, अबीर और केसर से सजकर भक्तों और पर्यटकों के लिए एक यादगार उत्सव साबित होगी। यह त्योहार न केवल बृज की संस्कृति को जीवित रखता है, बल्कि संतों और भक्तों के साथ सामूहिक उल्लास और भक्ति का भी प्रतीक है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









