Hisar Student Mahapanchayat: हरियाणा के हिसार में आयोजित ‘छात्र हित महापंचायत’ कई अहम निर्णयों के साथ संपन्न हुई। विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ती समस्याओं और छात्रों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर यह महापंचायत बुलाई गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, छात्र संगठन और युवा नेता शामिल हुए। इस दौरान छात्रों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और अपनी मांगों को लेकर सख्त रुख अपनाया।
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21 सदस्यीय कमेटी का गठन
महापंचायत के दौरान आंदोलन को संगठित और प्रभावी बनाने के लिए 21 सदस्यों की एक विशेष कमेटी का गठन किया गया। यह कमेटी आगे की रणनीति तैयार करेगी और प्रशासन के साथ बातचीत का नेतृत्व भी करेगी। छात्रों का मानना है कि एक संगठित नेतृत्व के जरिए उनकी बात को अधिक मजबूती से रखा जा सकेगा।
कमेटी ने प्रशासन को स्पष्ट रूप से 5 दिन का समय दिया है, जिसके भीतर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ ही कमेटी जल्द ही पुलिस अधिकारियों, जिनमें आईजी (IG) और एसपी (SP) शामिल हैं, से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेगी।
छात्रों की प्रमुख मांगें
महापंचायत में छात्रों ने कई मुद्दों को उठाया, लेकिन दो प्रमुख मांगों पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। पहली मांग यह है कि हाल ही में हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस केस बिना किसी शर्त के वापस लिए जाएं। छात्रों का कहना है कि यह केस उनकी आवाज दबाने के लिए दर्ज किए गए हैं।
दूसरी बड़ी मांग विश्वविद्यालय में मौजूद प्रशासनिक और बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने की है। छात्रों ने कहा कि कैंपस में कई आवश्यक सुविधाओं का अभाव है, जिससे उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की।
आंदोलन की अगली रणनीति
महापंचायत में यह भी तय किया गया कि यदि प्रशासन 5 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। छात्र नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि अगली महापंचायत और बड़े स्तर पर आयोजित की जाएगी, जिसमें ज्यादा संख्या में छात्र भाग लेंगे।
छात्रों ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में वे और सख्त कदम उठा सकते हैं। इसमें प्रदर्शन, धरना और अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध शामिल हो सकता है।
छात्रों की चेतावनी
महापंचायत में मौजूद छात्र नेताओं ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। छात्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम झुकेंगे नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे।” यह बयान इस बात का संकेत है कि छात्र अब अपने मुद्दों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।









