हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: शादी के बाद MP में रहने वाली महिलाओं को मिलेगा आरक्षण का फायदा

इंदौर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक बड़े और महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अन्य राज्य से शादी कर मध्य प्रदेश में स्थायी रूप से निवास करने वाली महिलाओं को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि महिला के पास मध्य प्रदेश का डोमिसाइल (निवास प्रमाण पत्र) है, तो वह आरक्षण की हकदार मानी जाएगी। कोर्ट ने तय की शर्तें जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरक्षण का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा, जो निम्न शर्तों को पूरा करती हों- महिला अभ्यर्थी

Wrriten By :

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Published On :

जनवरी 17, 2026

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इंदौर
 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक बड़े और महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अन्य राज्य से शादी कर मध्य प्रदेश में स्थायी रूप से निवास करने वाली महिलाओं को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि महिला के पास मध्य प्रदेश का डोमिसाइल (निवास प्रमाण पत्र) है, तो वह आरक्षण की हकदार मानी जाएगी।

कोर्ट ने तय की शर्तें

जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरक्षण का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलेगा, जो निम्न शर्तों को पूरा करती हों-

महिला अभ्यर्थी के पास मध्य प्रदेश का वैध डोमिसाइल प्रमाण पत्र हो।

उसकी जाति या समुदाय उसके मूल राज्य और मध्य प्रदेश, दोनों में आरक्षित श्रेणी में शामिल हो।

कोर्ट ने भर्ती बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि विज्ञापन और नियमों के दायरे से बाहर जाकर कोई नई शर्त नहीं जोड़ी जा सकती। अदालत ने पात्र उम्मीदवारों को तत्काल नियुक्ति देने, पिछला वेतन, वरिष्ठता और अन्य सभी वैधानिक लाभ प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं।

क्या था मामला

यह विवाद उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती से जुड़ा था। कई महिला अभ्यर्थियों ने आरक्षित वर्ग के अंतर्गत आवेदन कर लिखित परीक्षा पास की थी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनकी उम्मीदवारी यह कहकर रद्द कर दी गई कि उनके जाति प्रमाण पत्र उनके मूल राज्य से जारी हैं, न कि मध्य प्रदेश से। इस निर्णय को महिलाओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

उत्तराखंड हाई कोर्ट से अलग रुख

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला उत्तराखंड हाई कोर्ट के हालिया फैसले से अलग है। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा था कि आरक्षण का अधिकार जन्म के आधार पर तय होता है और विवाह से नहीं मिलता। वहीं मप्र हाई कोर्ट ने डोमिसाइल और दोनों राज्यों में जाति की समानता को आधार मानते हुए महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया है।

इस फैसले को प्रवासी बहुओं के संवैधानिक अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि महिला सभी वैधानिक शर्तें पूरी करती है, तो केवल विवाह के आधार पर उसे आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता।

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