हाईकोर्ट की सरकार को फटकार, बोला- बताइए संदीप पाठक पर FIR दर्ज हुई या नहीं

चंडीगढ़  राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ आपराधिक मामले को लेकर पंजाब सरकार की चुप्पी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- आप संकोच क्यों कर रहे हैं, एफआईआर है तो बता दीजिए, नहीं है तो भी बता दीजिए। अदालत ने सुनवाई टालते हुए बिना उसकी पूर्व अनुमति पाठक पर किसी कठोर कार्रवाई पर रोक जारी रखी। यह राहत अगले सप्ताह तक रहेगी। पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से लुका-छिपी खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आज तक यह बताने से बच रहा है कि पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज

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Published On :

मई 16, 2026

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चंडीगढ़ 
राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ आपराधिक मामले को लेकर पंजाब सरकार की चुप्पी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- आप संकोच क्यों कर रहे हैं, एफआईआर है तो बता दीजिए, नहीं है तो भी बता दीजिए। अदालत ने सुनवाई टालते हुए बिना उसकी पूर्व अनुमति पाठक पर किसी कठोर कार्रवाई पर रोक जारी रखी। यह राहत अगले सप्ताह तक रहेगी।

पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से लुका-छिपी खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य आज तक यह बताने से बच रहा है कि पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। पिछली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट जवाब मांगा था, लेकिन आज भी वही स्थिति है। 8 मई को सरकार ने कहा था- जानकारी नहीं, आज फिर वही जवाब।

राय ने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद का नहीं, हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का सवाल है। अगर किसी के खिलाफ मामला दर्ज होता है तो उसे जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया फैसले का हवाला देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे में उसे सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है।

पंजाब सरकार के वकील ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मीडिया रिपोर्टों पर आधारित आशंका है। याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत यह समझने में असमर्थ है कि राज्य यह बताने में क्यों हिचक रहा है कि संज्ञेय अपराध दर्ज हुआ या नहीं। कोर्ट ने साफ किया- जब तक फैसला नहीं होता, बिना अदालत की इजाजत पाठक पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

 अगली सुनवाई अगले सप्ताह
संजीव अरोड़ा की दलीलों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं, फिलहाल नहीं दी कोई राहत

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अपनी गिरफ्तारी व रिमांड को पूर्वनियोजित, कानूनविहीन और संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ बताया। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा- ईडी ने पीएमएलए की प्रक्रियाओं की अवहेलना कर गिरफ्तारी को औपचारिकता बना दिया। हाईकोर्ट ने लंबी बहस के बाद असंतुष्टि जताते हुए फिलहाल कोई राहत नहीं दी।

अरोड़ा के वकीलों ने बताया कि उन्हें वास्तव में सुबह 7:15 बजे हिरासत में ले लिया गया जबकि आधिकारिक गिरफ्तारी का समय शाम 4 बजे दर्शाया गया। अदालत में कहा गया- यह स्वतंत्रता पर प्रहार है और गिरफ्तारी की पारदर्शिता व वैधानिकता पर सवाल खड़े करता है। घंटों नियंत्रण में रखकर बाद में गिरफ्तारी दिखाना कानून की मूल भावना के विपरीत है।

अदालत को बताया गया कि 5 मई के ईसीआईआर और 9 मई की छापेमारी के बीच ईडी ने धारा 50 के तहत कोई समन जारी नहीं किया, न स्वतंत्र पूछताछ की, न कोई नया साक्ष्य जुटाया। बचाव पक्ष ने कहा- पुराने फेमा मामले की सामग्री को पीएमएलए गिरफ्तारी का आधार बनाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

अरोड़ा की ओर से एक और बड़ा सवाल उठाया गया- जिस अधिकारी ने पहले फेमा में शिकायतकर्ता की भूमिका निभाई, वही पीएमएलए की धारा 19 के तहत रीजन टू बिलीव कैसे बना सकता है। इसे अपने मामले का जज बताते हुए कहा गया कि पूर्वाग्रहग्रस्त अधिकारी से निष्पक्ष संतुष्टि संभव नहीं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद मामला सोमवार दोपहर के लिए टाल दिया। फिलहाल अरोड़ा को राहत नहीं मिली है। गौरतलब है कि अरोड़ा के खिलाफ गुरुग्राम में केस दर्ज हुआ था।

 

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