Health Tips: भारतीय थाली में पोषण का असंतुलन, स्वाद में आगे पर सेहत में पीछे

भारतीय थाली को लेकर आई नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि हमारी डाइट में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा और प्रोटीन बेहद कम है। यह असंतुलन धीरे-धीरे डायबिटीज, मोटापा और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने की आदतों में बदलाव बेहद जरूरी हो गया है।

भारतीय थाली में पोषण का असंतुलन

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 27, 2026

Health Tips: भारतीय भोजन को उसके स्वाद और विविधता के लिए पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है, लेकिन हाल ही में आई एक स्टडी ने हमारी रोजमर्रा की डाइट को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीयों के खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अत्यधिक है, जबकि प्रोटीन और हेल्दी फैट का सेवन काफी कम है। यही असंतुलन कई तरह की जीवनशैली संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है।

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शोध में क्या सामने आया?

यह अध्ययन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा किया गया है, जिसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Nature Medicine में प्रकाशित किया गया। रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों की कुल दैनिक कैलोरी का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा केवल कार्बोहाइड्रेट से आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह असंतुलन लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

देशभर की डाइट का विश्लेषण

इस अध्ययन में “इंडिया डायबिटीज स्टडी” के तहत देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.21 लाख से अधिक लोगों के खानपान और स्वास्थ्य पैटर्न का विश्लेषण किया गया। निष्कर्ष में पाया गया कि दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में चावल मुख्य भोजन के रूप में सबसे अधिक खाया जाता है, जबकि उत्तर और मध्य भारत में गेहूं आधारित आहार का दबदबा है। इसके अलावा, मोटे अनाज (मिलेट्स) का सेवन केवल कुछ राज्यों जैसे कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र तक ही सीमित पाया गया।

प्रोटीन की कमी बनी सबसे बड़ी समस्या

प्रोटीन की कमी बनी सबसे बड़ी समस्या
प्रोटीन की कमी बनी सबसे बड़ी समस्या

रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण चिंता यह सामने आई कि भारतीयों की डाइट में प्रोटीन की भारी कमी है। कुल कैलोरी का केवल लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा ही प्रोटीन से आता है, जबकि विशेषज्ञ कम से कम 15 प्रतिशत प्रोटीन सेवन की सलाह देते हैं। इसमें भी अधिकांश प्रोटीन पौधों पर आधारित स्रोतों से मिलता है, जबकि डेयरी उत्पादों का योगदान लगभग 2 प्रतिशत और पशु-आधारित प्रोटीन का हिस्सा सिर्फ 1 प्रतिशत के आसपास है।

ज्यादा कार्बोहाइड्रेट से बढ़ रहा खतरा

अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों की डाइट में कार्बोहाइड्रेट अधिक है, उनमें टाइप-2 डायबिटीज, प्रीडायबिटीज और पेट के आसपास मोटापा बढ़ने का खतरा 15 से 30 प्रतिशत तक अधिक पाया गया है। इसके साथ ही 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जरूरत से ज्यादा चीनी के सेवन की भी पुष्टि हुई है, जो स्वास्थ्य के लिए और अधिक जोखिम पैदा करता है।

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केवल अनाज बदलना समाधान नहीं

शोधकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ सफेद चावल को गेहूं या मिलेट्स से बदलना ही पर्याप्त नहीं है। यदि कुल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक बनी रहती है, तो स्वास्थ्य जोखिम कम नहीं होंगे। इसलिए संतुलित आहार अपनाना बेहद जरूरी है।

प्रोटीन क्यों है जरूरी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय थाली में दाल, पनीर, अंडे, दूध, दही, सोया, नट्स और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना आवश्यक है। प्रोटीन न केवल मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, बल्कि यह लंबे समय तक भूख नियंत्रित रखता है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में भी मदद करता है।

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