अंग्रेजों की लाठियां खाईं, आजादी की लड़ाई लड़ी और बने मध्यप्रदेश के पहले CM

भोपाल. मध्य प्रदेश के निर्माण और विकास की नींव रखने वाले पंडित रविशंकर शुक्ल का नाम भारतीय राजनीति और स्वतंत्रता आंदोलन में अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। 1 नवंबर 1956 को जब मध्य प्रदेश का गठन हुआ, तब सर्वसम्मति से उन्हें नए राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया। वे एक कुशल प्रशासक, दूरदर्शी राजनेता और समर्पित स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। सागर में जन्म, अध्यापन से वकालत और फिर आजादी की लड़ाई में कूदे पंडित रविशंकर शुक्ल का जन्म 2 अगस्त 1877 को

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Published On :

नवम्बर 1, 2026

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भोपाल.

मध्य प्रदेश के निर्माण और विकास की नींव रखने वाले पंडित रविशंकर शुक्ल का नाम भारतीय राजनीति और स्वतंत्रता आंदोलन में अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। 1 नवंबर 1956 को जब मध्य प्रदेश का गठन हुआ, तब सर्वसम्मति से उन्हें नए राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया।

वे एक कुशल प्रशासक, दूरदर्शी राजनेता और समर्पित स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

सागर में जन्म, अध्यापन से वकालत और फिर आजादी की लड़ाई में कूदे
पंडित रविशंकर शुक्ल का जन्म 2 अगस्त 1877 को सागर (मध्य प्रदेश) में पंडित जगन्नाथ शुक्ल के घर हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सागर और रायपुर में हुई, जिसके बाद उन्होंने जबलपुर के रॉबर्टसन कॉलेज से स्नातक और फिर विधि (कानून) की पढ़ाई पूरी की। शुरुआत में उन्होंने अध्यापन का कार्य किया और बाद में रायपुर में वकालत शुरू की।

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