Haryana News: हरियाणा मंडियों में सूरजमुखी खरीद जारी, आढ़तियों की कमीशन बढ़ोतरी मांग खारिज

हरियाणा की मंडियों में सूरजमुखी खरीद जारी है, लेकिन आढ़तियों की 2.5 प्रतिशत कमीशन बढ़ोतरी की मांग को सरकार ने खारिज कर दिया है। अब 1 प्रतिशत आढ़त पर ही खरीद होगी। जानिए किसानों को क्या फायदा मिला, MSP कितना बढ़ा और क्यों बढ़ा आढ़त विवाद।

हरियाणा मंडियों में सूरजमुखी खरीद जारी

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 29, 2026

Haryana News: हरियाणा में सूरजमुखी की खरीद को लेकर चल रहे विवाद के बीच सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। राज्य की मंडियों में सूरजमुखी की खरीद अब 1 प्रतिशत आढ़त पर ही की जाएगी। आढ़तियों द्वारा कमीशन बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत करने की मांग को सरकार ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।

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सरकार का साफ संदेश 

खाद्य एवं आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामलों के मंत्री राजेश नागर ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आढ़त बढ़ाने का फैसला केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होता है। राज्य सरकार उन्हीं नियमों का पालन करने के लिए बाध्य है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछली बार की तरह इस बार भी 1 प्रतिशत आढ़त पर ही सूरजमुखी की खरीद की जाएगी।

एमएसपी में बढ़ोतरी से किसानों को फायदा

सरकार ने इस बार सूरजमुखी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7721 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह पिछले वर्ष के 7280 रुपये प्रति क्विंटल से 441 रुपये अधिक है। इस बढ़ोतरी से किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। इसके अलावा भावांतर भुगतान योजना को लेकर भी सरकार के स्तर पर विचार किया जा रहा है।

मंडियों में तेजी से पहुंच रही फसल

सरकार की सख्ती के बाद हरियाणा की विभिन्न मंडियों में सूरजमुखी की आवक तेज हो गई है। अब तक चार जिलों की 13 मंडियों में कुल 1320.30 मीट्रिक टन सूरजमुखी पहुंच चुकी है। वीरवार को ही लगभग 789.95 मीट्रिक टन फसल क्रय केंद्रों पर लाई गई। अंबाला में 323.19 मीट्रिक टन, कुरुक्षेत्र में 505.87 मीट्रिक टन, पंचकूला में 473.60 मीट्रिक टन और यमुनानगर में 17.73 मीट्रिक टन सूरजमुखी की आवक दर्ज की गई है।

आढ़तियों की नाराजगी और विरोध

हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राम अवतार तायल ने कहा कि 1 प्रतिशत आढ़त पर काम करना उनके लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं है। उनके अनुसार, इस दर पर प्रति क्विंटल केवल लगभग 70 रुपये कमीशन मिलता है, जबकि ढाई प्रतिशत पर यह राशि बढ़कर करीब 182 रुपये प्रति क्विंटल हो सकती है। आढ़तियों का कहना है कि मौजूदा कमीशन में मजदूरी, परिवहन और अन्य खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है, इसलिए वे कम दर पर फसल खरीदने में असमर्थ हैं।

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किसानों और सरकार के बीच संतुलन की कोशिश

सरकार जहां किसानों को अधिक MSP देकर राहत देने की कोशिश कर रही है, वहीं आढ़तियों की मांगें असंतोष का कारण बन रही हैं। इसके बावजूद प्रशासन का कहना है कि खरीद प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के जारी रखा जाएगा।