Haryana Politics: हरियाणा की सियासत में हलचल! भाजपा की गुटबाजी फिर बनी चर्चा का विषय

रेवाड़ी, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत का गृह क्षेत्र माना जाता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार दक्षिण हरियाणा भाजपा में लंबे समय से गुटबाजी और अलग-अलग शक्ति केंद्रों का प्रभाव दिखाई देता है।

Haryana Politics

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 19, 2026

Haryana Politics: दक्षिण हरियाणा की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर चल रहा अंतर्कलह अब किसी से छिपा नहीं है। लंबे समय से केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह का खेमा और प्रदेश के अन्य वरिष्ठ नेताओं, जिनमें पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव और राव नरबीर सिंह शामिल हैं, के बीच चल रही तनातनी अब खुलकर सार्वजनिक मंचों पर दिखने लगी है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के तमाम दावों के बावजूद स्थानीय स्तर पर शक्ति प्रदर्शन और बयानों के जरिए एक-दूसरे को नीचा दिखाने का सिलसिला जारी है।

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बयानों का ‘कन्यादान’ और श्रेय की लड़ाई

इस आपसी खींचतान का सबसे ताजा उदाहरण रेवाड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान सामने आया। कोरियावास मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन समारोह में पूर्व मंत्री डॉ. अभय सिंह यादव का बयान काफी चर्चा में रहा। उन्होंने बिना नाम लिए खुद की तुलना उस पिता से की, जिसने बेटी को तो पाला, लेकिन कन्यादान के समय उसे ही दरकिनार कर दिया गया। उनका सीधा इशारा मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए की गई अपनी मेहनत और उसके उद्घाटन का श्रेय दूसरे खेमे के पास चले जाने पर था।

इसके तुरंत बाद मंत्री आरती राव ने भी बिना किसी का नाम लिए जवाब दिया कि किसी एक व्यक्ति के रहने या न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह जुबानी जंग स्पष्ट करती है कि दक्षिण हरियाणा भाजपा में नेतृत्व को लेकर गहरा अविश्वास और आपसी मतभेद व्याप्त हैं।

कार्यक्रमों से दूरी और शक्ति केंद्रों का प्रदर्शन

गुटबाजी का असर पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों में भी देखने को मिल रहा है। हाल ही में रेवाड़ी में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की उपस्थिति थी, लेकिन केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और जिले के तीनों स्थानीय भाजपा विधायक कार्यक्रम से नदारद रहे। इतना ही नहीं, पार्टी के पांच मंडल अध्यक्षों का भी इस आयोजन से दूर रहना कोई सामान्य घटना नहीं थी। यह सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रमों के बहिष्कार की तरह देखा जा रहा है।

संगठनात्मक नियुक्तियों में भी यह टकराव साफ झलकता है। हाल ही में जब जिला जनसंपर्क एवं कष्ट निवारण समितियों के प्रभारी मंत्रियों की सूची जारी हुई, तो राव नरबीर को रेवाड़ी की जिम्मेदारी दी गई थी। इस पर राव इंद्रजीत ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद राव नरबीर को वहां से हटाकर झज्जर भेज दिया गया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि दक्षिण हरियाणा में राव इंद्रजीत सिंह अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं, जबकि अन्य नेता अपनी अलग जगह बनाने के लिए संघर्षरत हैं।

चुनावी भविष्य के लिए चुनौती

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दक्षिण हरियाणा में भाजपा अलग-अलग शक्ति केंद्रों में विभाजित हो चुकी है। यद्यपि भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता का कहना है कि यह छोटी-मोटी बातें हैं और संवाद से सुलझा ली जाएंगी, लेकिन जमीन पर स्थिति कुछ और ही इशारा कर रही है। यदि समय रहते शीर्ष नेतृत्व ने इस गुटबाजी पर नकेल नहीं कसी, तो संगठन की एकजुटता प्रभावित हो सकती है, जिसका नकारात्मक असर भविष्य के चुनावी परिणामों पर पड़ना निश्चित है। फिलहाल, भाजपा का यह ‘बड़ा परिवार’ अपने ही घर के भीतर वर्चस्व की लड़ाई लड़ता हुआ नजर आ रहा है।

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