Haryana News: हरियाणा की राजनीति में अनोखा उदाहरण, 3 बार मंत्री बने, फिर भी नहीं ली सरकारी कोठी

हरियाणा की राजनीति में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। तीन बार मंत्री बनने के बाद भी इस नेता ने सरकारी कोठी लेने से इनकार कर दिया। आखिर ऐसी कौन सी वजह थी जिसने उन्हें सरकारी सुविधाओं से दूर रहने का फैसला करने पर मजबूर किया?

हरियाणा की राजनीति में अनोखा उदाहरण

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 11, 2026

Haryana News: हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में मंत्री पद संभालने के बाद सरकारी आवास लेना एक आम परंपरा रही है। प्रदेश के गठन के बाद से ही अधिकांश मंत्रियों ने चंडीगढ़ में मिलने वाली सरकारी कोठियों को अपने आधिकारिक निवास के रूप में अपनाया। जैसे ही कोई विधायक मंत्री बनता है, उसके लिए राजधानी में बेहतर सरकारी आवास की व्यवस्था को लेकर चर्चाएं शुरू हो जाती हैं।

चंडीगढ़ के सेक्टर-5, सेक्टर-7 और सेक्टर-16 जैसे क्षेत्रों में स्थित सरकारी कोठियां लंबे समय से मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की पसंद रही हैं। पद, वरिष्ठता और जिम्मेदारी के आधार पर इन आवासों का आवंटन किया जाता है। राजनीतिक गलियारों में इन सरकारी घरों को कई बार प्रतिष्ठा और प्रभाव से जोड़कर भी देखा जाता है।

लेकिन हरियाणा की राजनीति में एक ऐसा नेता भी है जिसने वर्षों पुरानी इस परंपरा से अलग रास्ता चुना। ऊर्जा, परिवहन और श्रम विभाग संभाल रहे कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने मंत्री बनने के बाद भी सरकारी आवास लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने सादगी और जनता से जुड़े रहने को प्राथमिकता देते हुए अब तक न तो मंत्री कोठी ली और न ही विधायक फ्लैट का इस्तेमाल किया।

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अंबाला से चंडीगढ़ तक रोजाना सफर

अनिल विज पिछले करीब साढ़े 11 वर्षों से हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने चंडीगढ़ में सरकारी निवास रखने के बजाय अपने विधानसभा क्षेत्र अंबाला छावनी से ही कामकाज जारी रखा। वे प्रतिदिन अंबाला से चंडीगढ़ पहुंचकर मंत्रालय से जुड़े कार्यों को पूरा करते हैं और दिनभर की सरकारी जिम्मेदारियों के बाद वापस अपने क्षेत्र लौट जाते हैं। लंबी दूरी तय करने के बावजूद उन्होंने अपने इस निर्णय को लगातार कायम रखा है। उनका यह कदम इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि सार्वजनिक जीवन में पद और सुविधाओं से अधिक महत्व कर्तव्य और जनता के प्रति जुड़ाव का हो सकता है।

तीन सरकारों में मंत्री पद

साल 2014 में हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई थी। इस सरकार में अनिल विज को महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी के साथ वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके बाद 2019 और 2024 में बनी सरकारों में भी वे लगातार मंत्री पद पर बने रहे। तीन अलग-अलग कार्यकालों में सत्ता का हिस्सा रहने और वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उन्होंने कभी सरकारी आवास की मांग नहीं की। आमतौर पर मंत्री पद के साथ मिलने वाली सुविधाओं में सरकारी कोठी सबसे प्रमुख मानी जाती है, लेकिन अनिल विज ने इससे अलग उदाहरण प्रस्तुत किया।

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राजनीति में अलग पहचान बनाने वाला फैसला

हरियाणा के गठन के बाद लगभग छह दशकों के राजनीतिक इतिहास में ऐसा उदाहरण बेहद कम देखने को मिलता है, जब कोई वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री इतने लंबे समय तक बिना सरकारी आवास के अपनी जिम्मेदारियां निभाता रहा हो। अनिल विज का यह निर्णय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थक इसे सादगी, अनुशासन और जनता के बीच बने रहने की सोच से जोड़ते हैं। उनका यह कदम उन नेताओं के लिए भी एक अलग संदेश देता है कि सार्वजनिक पद केवल सुविधाओं का माध्यम नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर भी है।