Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ी पहल की है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत कुल 77 करोड़ 62 करोड़ 88 हजार 779 रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय का उद्देश्य राज्य के सभी लाभार्थियों तक समय पर और सुचारु रूप से खाद्यान्न पहुंचाना है।
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चार महीनों के लिए खर्च को मिली मंजूरी
सरकार द्वारा स्वीकृत यह राशि नवंबर 2025 से फरवरी 2026 तक की अवधि के लिए निर्धारित की गई है। इस दौरान राशन वितरण से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं जैसे खाद्यान्न की हैंडलिंग, परिवहन और डिपो होल्डर कमीशन का भुगतान किया जाएगा। इस वित्तीय प्रावधान में परिवहन शुल्क और फेयर प्राइस शॉप (FPS) संचालकों को दिए जाने वाले कमीशन को भी शामिल किया गया है।
डिपो संचालकों और एजेंसियों को राहत
इस योजना के तहत सबसे अधिक खर्च फेयर प्राइस शॉप मार्जिन पर किया गया है, जिससे राज्य के डिपो संचालकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि समय पर भुगतान होने से राशन वितरण प्रणाली और अधिक प्रभावी होगी। इसके साथ ही कॉन्फेड (CONFED) को खाद्यान्न उठान और वितरण के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि सभी जिलों में राशन सप्लाई सुचारु रूप से चलती रहे।
जिला स्तर पर भुगतान व्यवस्था
सरकार के निर्देशों के अनुसार, इस पूरी राशि का भुगतान जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, पंचकूला के माध्यम से किया जाएगा। इससे वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। यह व्यवस्था राज्य के सभी जिलों में एक समान रूप से लागू की जाएगी ताकि किसी भी स्तर पर देरी या अनियमितता न हो।
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पुराने आदेशों में संशोधन कर नई मंजूरी
सरकार ने इससे पहले जारी किए गए कुछ पुराने स्वीकृति आदेशों को वापस लेते हुए एक नई समेकित मंजूरी जारी की है। इसका उद्देश्य वित्तीय प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। नए आदेशों के तहत सभी संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि भुगतान समय पर किया जाए और किसी भी प्रकार की देरी न हो।
उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने के निर्देश
कॉन्फेड को यह भी निर्देश दिया गया है कि सभी जिलों में राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जाए और दो महीने के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) सरकार को जमा कराया जाए। इससे सरकारी धन के सही उपयोग की निगरानी की जा सकेगी और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहेगी।










