Haryana News: गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के पावन अवसर पर हरियाणा लोक भवन में एक गरिमामयी और श्रद्धा से ओत-प्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर राज्य के महामहिम राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा सादगी के प्रतीक पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यह आयोजन दोनों महान विभूतियों के देश के प्रति दिए गए अद्वितीय योगदान, त्याग और संघर्ष को याद करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।
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राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और प्रथम महिला की उपस्थिति

लोक भवन में आयोजित इस मुख्य समारोह की शुरुआत राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ हुई। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मूल्य आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान थे। वहीं, उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के प्रसिद्ध नारे ‘जय जवान, जय किसान’ को याद करते हुए उनके देश के प्रति समर्पण, ईमानदारी और सादगीपूर्ण जीवनशैली को युवाओं के लिए एक अनुकरणीय आदर्श बताया।
सर्व-धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन और राष्ट्रीय एकता का संदेश

समारोह के दौरान एक विशेष सर्व-धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जो इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। इस प्रार्थना सभा में विभिन्न धर्मों के धार्मिक ग्रंथों के अंश पढ़े गए और शांति के गीत गाए गए। इस सभा का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति, आपसी भाईचारे, सांप्रदायिक सद्भाव और अटूट राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना था। सर्व-धर्म प्रार्थना के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विविधता में एकता ही भारत की असली ताकत है और देश को आगे ले जाने के लिए सभी नागरिकों को एकजुट होकर काम करना होगा।
महान विभूतियों के आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने दोनों महान नेताओं के जीवन दर्शन पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि केवल जयंती के दिन स्मरण करने के बजाय हमें गांधीजी के स्वच्छता, स्वदेशी और अहिंसा के सिद्धांतों तथा शास्त्रीजी के कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र-प्रथम के भाव को अपने दैनिक जीवन में उतारना चाहिए। वर्तमान पीढ़ी को उनके संघर्षों से प्रेरणा लेकर देश के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
यह गरिमापूर्ण आयोजन न केवल हरियाणा लोक भवन में बल्कि पूरे राज्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, जहाँ सभी ने मिलकर देश के इन दो महान सपूतों के सपनों का एक सशक्त, शांतिप्रिय और आत्मनिर्भर भारत बनाने का संकल्प लिया।
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