Haryana News: हरियाणा में ग्रुप-डी कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा संशय आखिरकार समाप्त हो गया है। नायब सिंह सैनी सरकार ने विज्ञापन संख्या 4/2018 के तहत चयनित चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी) कर्मचारियों के काडर और सीनियरिटी (वरिष्ठता) से जुड़े नियमों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कामन काडर में बने रहने या काडर बदलने से हर स्थिति में कर्मचारियों की वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी।
इसके साथ ही, कर्मचारियों को अपने विकल्प में सुधार करने या नया विकल्प चुनने के लिए पोर्टल को एक बार फिर से 5 से 20 अक्टूबर तक खोलने का निर्देश जारी किया गया है। आइए इस पूरे फैसले और सीनियरिटी से जुड़े नियमों को विस्तार से समझते हैं।
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क्यों पैदा हुआ था भ्रम और क्यों दोबारा खोला गया पोर्टल?

मानव संसाधन विभाग ने 17 जुलाई को ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया था। इसमें कर्मचारियों को यह विकल्प चुनना था कि वे ‘कामन काडर’ में बने रहना चाहते हैं या फिर कामन काडर से बाहर निकलकर अपने संबंधित विभाग के सेवा नियमों के तहत काम करना चाहते हैं।
हालाँकि, पोर्टल पर विकल्प भरते समय एक तकनीकी या अस्पष्ट संदेश आ रहा था, जिससे कर्मचारियों के बीच यह गलत धारणा बन गई कि यदि वे काडर बदलते हैं या किसी भी विकल्प को चुनते हैं, तो उनकी वरिष्ठता (सीनियरिटी) हर हाल में समाप्त हो जाएगी। इस भ्रम के कारण कई कर्मचारियों ने गलत विकल्प चुन लिया था। सरकार ने इस समस्या को संज्ञान में लेते हुए अब स्थिति स्पष्ट की है और पोर्टल को 5 से 20 अक्टूबर तक दोबारा खोलने का निर्णय लिया है।
कॉमन काडर में बने रहने पर कैसे तय होगी सीनियरिटी?
सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, जो कर्मचारी सामान्य काडर (कॉमन काडर) में बने रहने का विकल्प चुनते हैं, उनकी सेवाएं ‘हरियाणा समूह-डी कर्मचारी (भर्ती और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 2018’ (संशोधित) के तहत संचालित होंगी। ऐसे कर्मचारियों की वरिष्ठता हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा मूल रूप से तैयार की गई संयुक्त योग्यता सूची (Joint Merit List) के आधार पर ही निर्धारित की जाएगी। यानी उनकी पुरानी सीनियरिटी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।
अलग-अलग स्थितियों में सीनियरिटी निर्धारण के नियम

सरकार ने विभिन्न परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों की वरिष्ठता तय करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं। यदि किसी कर्मचारी को 24 जून 2019 के आदेशों के तहत एक बार विभाग बदलने का मौका मिला था और वह 2024 के ट्रांसफर ड्राइव के बिना उसी विभाग में सेवा दे रहा है, तो उस विभाग को ही उसका मूल विभाग माना जाएगा। यदि वह कॉमन काडर से बाहर रहने का विकल्प चुनता है, तो उसकी सीनियरिटी HSSC मेरिट और विभाग के सेवा नियमों के अनुसार बनी रहेगी।
यदि किसी कर्मचारी का तबादला 2024 के सामान्य तबादला अभियान के दौरान किसी नए विभाग में हुआ था और अब वह उसी वर्तमान विभाग में रहने का विकल्प चुनता है, तो उसे उस नए विभाग में ‘नवनियुक्त कर्मचारी’ माना जाएगा। ऐसे मामलों में, कर्मचारी को उस नए विभाग में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि के आधार पर वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे (Bottom of Seniority) रखा जाएगा। हरियाणा सरकार के इस स्पष्टीकरण से हजारों कर्मचारियों की चिंताएं दूर हो गई हैं और वे अब 5 से 20 अक्टूबर के बीच बिना किसी भ्रम के अपना सही विकल्प दर्ज कर सकेंगे।
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