Haryana News: हरियाणा में शिक्षा के साथ संस्कारों पर जोर, पाठ्यक्रम में जुड़ा सिख इतिहास

हरियाणा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में ऐसा बदलाव किया है जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। अब स्कूलों में छात्रों को एक नए ऐतिहासिक अध्याय से परिचित कराया जाएगा। आखिर पाठ्यक्रम में क्या जोड़ा गया है, इससे विद्यार्थियों को क्या लाभ होगा और क्यों इसे अहम फैसला माना जा रहा है?

हरियाणा में शिक्षा के साथ संस्कारों पर जोर

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 12, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य के स्कूलों के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन एवं योगदान को शामिल करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा किया गया यह वादा अब धरातल पर उतर चुका है। इसके तहत कक्षा 8वीं के विद्यार्थियों को सिख इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय पढ़ाए जाएंगे, जिससे वे देश के महान संतों, योद्धाओं और समाज सुधारकों के जीवन से प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगे। इस फैसले से प्रदेश के लाखों छात्रों को भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अध्याय को समझने का अवसर मिलेगा।

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मुख्यमंत्री की घोषणा को मिला अमलीजामा

सीएम नायब सिंह सैनी ने बताया कि उन्होंने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के अवसर पर सिख इतिहास को स्कूल शिक्षा का हिस्सा बनाने की घोषणा की थी। अब सरकार ने उस घोषणा को पूरा करते हुए इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं की शिक्षाएं केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके जीवन और विचार आज भी समाज को सही दिशा देने का काम कर रहे हैं।

सिख गुरुओं के जीवन से मिलेंगे महत्वपूर्ण संस्कार

बताते चलें कि, नए पाठ्यक्रम में श्री गुरु नानक देव जी से लेकर श्री गुरू गोबिंद सिंह जी तक सभी सिख गुरुओं के जीवन, शिक्षाओं और समाज के लिए किए गए योगदान को शामिल किया जाएगा। इन महान गुरुओं ने मानवता, समानता, भाईचारे, सेवा, करुणा और सामाजिक न्याय का संदेश दिया। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को सत्य एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों को इन मूल्यों से परिचित कराकर उनमें बेहतर नागरिक बनने की भावना विकसित की जा सकती है।

बाबा बंदा सिंह बहादुर के संघर्ष से मिलेगी प्रेरणा

पाठ्यक्रम में बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन और उनके संघर्षों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए कमजोर और वंचित वर्गों को सम्मान दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया था। उनका जीवन साहस, राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा का प्रतीक माना जाता है। विद्यार्थियों को उनके जीवन से न्याय के लिए संघर्ष करने और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलेगी।

शिक्षा के साथ संस्कारों पर भी जोर

हरियाणा सरकार का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित ज्ञान देना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण करना भी है। इसी सोच के तहत पाठ्यक्रम में ऐसे विषयों को शामिल किया जा रहा है जो छात्रों में देशभक्ति, सेवा भावना, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों को मजबूत करें। सरकार का मानना है कि इतिहास के प्रेरणादायक अध्याय युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकते हैं।

सिख समाज ने फैसले का किया स्वागत

सरकार के इस निर्णय का सिख समाज ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. प्रभलीन सिंह ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला लंबे समय से की जा रही एक महत्वपूर्ण मांग को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए एक सराहनीय कदम उठाया है। यह निर्णय राज्य सरकार की समावेशी सोच और सभी वर्गों के प्रति समान सम्मान की भावना को दर्शाता है।

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छात्रों को मिलेगा इतिहास से जुड़ने का अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यक्रम में सिख इतिहास को शामिल करने से विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे उन महान व्यक्तित्वों के जीवन से परिचित होंगे जिन्होंने देश और समाज के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। यह पहल शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी में जागरूकता, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।