Haryana News: शहीद स्मारक में दिखेगी आजादी की पहली लड़ाई की गाथा, अनिल विज ने किया निरीक्षण

हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने अंबाला छावनी में नवनिर्मित 'आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक' का निरीक्षण किया।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 16, 2026

Haryana News: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अंबाला छावनी में निर्माणाधीन ‘आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक’ का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्मारक में आयोजित भव्य ‘लाइट एंड साउंड शो’ का अवलोकन किया। यह स्मारक न केवल एक इमारत है, बल्कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की उस चिंगारी को जीवंत करने का एक माध्यम है, जिसने पूरे भारत में आजादी के आंदोलन की नींव रखी थी। मंत्री अनिल विज ने इस अवसर पर कहा कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को हमारे महान क्रांतिकारियों के बलिदान और संघर्ष की गाथा से रूबरू कराएगा।

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स्वतंत्रता की पहली चिंगारी

अनिल विज ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी के प्रति जज्बा 10 मई 1857 को अंबाला छावनी से शुरू हुआ था। यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि देश के इतिहास में अंबाला की इस भूमिका को वह उचित स्थान नहीं मिला जिसका यह हकदार था। उन्होंने कहा कि उस दौरान पूरे हिंदुस्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र जंग लड़ी थी, और आजादी पाने की जो भावना पूरे देश में जागृत हुई थी, उसकी शुरुआत यहीं से हुई थी।

अब सरकार के प्रयासों से अंबाला का यह गौरवशाली इतिहास देश के सामने आएगा। मंत्री ने विश्वास जताया कि इस शहीद स्मारक के उद्घाटन के बाद, हर साल 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के अवसर पर यहां शाम को विशेष सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो देशप्रेम की भावना को और प्रगाढ़ करेंगे।

22 एकड़ में फैला इतिहास का आधुनिक केंद्र

यह शहीद स्मारक अंबाला छावनी में लगभग 22 एकड़ के विशाल क्षेत्र में विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है। यहां केवल अंबाला ही नहीं, बल्कि मेरठ, झांसी और उन सभी स्थानों के संघर्ष की गाथा को डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा, जहां 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक लड़ाइयां लड़ी गई थीं।

तकनीक का समावेश: ‘लाइट एंड साउंड शो’ के माध्यम से दर्शकों को ऐसा अनुभव मिलेगा मानो वे खुद उस दौर के संघर्ष के साक्षी बन रहे हों।

राष्ट्रीय एकीकरण: यह स्मारक न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उन गुमनाम नायकों को समर्पित है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

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