Haryana News: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों पक्षों के बीच जारी भारी तनाव के बीच आज, 23 अक्टूबर 2026 को पंचकूला में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। ‘हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड’ (HVPNL) ने ‘हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ को औपचारिक वार्ता के लिए आमंत्रित करते हुए नोटिस जारी किया है। यह महा-बैठक दोपहर ठीक 3:00 बजे पंचकूला के सेक्टर-1 स्थिति पीडब्ल्यूडी (PWD) रेस्ट हाउस में आयोजित की जा रही है, जिस पर प्रदेश भर की नजरें टिकी हुई हैं।
शीर्ष अधिकारियों और मोर्चा प्रतिनिधियों की मौजूदगी

इस महत्वपूर्ण वार्ता की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार की ओर से बिजली निगमों के तमाम शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी इसमें शामिल हो रहे हैं। बैठक में एचपीयू (HPUs) के अध्यक्ष एवं ऊर्जा सचिव के अलावा ‘हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (HPGCL), ‘हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड’ (HVPNL), ‘उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम’ (UHBVNL) और ‘दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम’ (DHBVNL) के प्रबंध निदेशक (MD) विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। सरकार और बिजली निगमों की पूरी आलाकमान की मौजूदगी यह दर्शाती है कि प्रशासन इस गतिरोध को जल्द से जल्द सुलझाने के मूड में है।
क्यों और किन हालात में बुलाई गई यह बैठक?
बिजली कर्मचारियों की ओर से अपनी लंबित मांगों और विभिन्न समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाई जा रही थी। इसी क्रम में ‘संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ द्वारा बीते 19 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक पत्र (क्रमांक HBKESSM/1) प्रशासन को भेजा गया था। पत्र में कर्मचारियों ने अपनी प्राथमिक मांगों को प्रमुखता से रेखांकित करते हुए आंदोलन का रुख अपनाने के संकेत दिए थे।
कर्मचारियों के कड़े रुख और संभावित हड़ताल से होने वाले व्यापक नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने सकारात्मक पहल की है। सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों का पालन करते हुए HVPNL के उप सचिव (HR-III) द्वारा तुरंत वार्ता का नोटिस जारी किया गया ताकि संवाद के जरिए रास्ता निकाला जा सके।
टकराव टलेगा या बढ़ेगी टेंशन?

हरियाणा भर के बिजली कर्मचारियों, अधिकारियों और आम जनता की निगाहें इस समय पंचकूला के PWD रेस्ट हाउस पर टिकी हैं। कर्मचारियों में लंबे समय से लंबित पड़ी मांगों और प्रशासनिक रवैये को लेकर भारी नाराजगी है। ऐसे में आज की इस वार्ता से यह तय होगा कि सरकार उनकी मांगों पर कितना लचीला रुख अपनाती है। यदि इस महा-बैठक में कर्मचारियों के मुद्दों पर सहमति बन जाती है, तो प्रदेश में एक बड़ा प्रशासनिक और जन-समस्या का संकट टल सकता है। लेकिन अगर बातचीत बेनतीजा रही, तो कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ सकता है, जिससे आने वाले दिनों में बिजली सेवाओं पर असर पड़ने की पूरी संभावना है।
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