Haryana News: सिरसा से सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री औऱ कुमारी सैलजा ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड व्यूरो (NCRB) की हालिया रपोर्ट में दुख जताया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में महिलाओं के खिलाफ अपराध पहले से ही चिंता का विषय बने हुए थे, लेकिन अब बच्चों के विरुद्ध अपराधों में भी राज्य का देश में शार्ष स्थान पर पहुंचाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति सर्फ कानून व्यवस्था की कमजोरी को नहीं दर्शाता, बल्कि समाज में बढ़ती संवेदनशीलता को भी उजागर करती है। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा किसी भी सभ्य समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है और अगर वो ही सुरक्षित नहीं है तो विकास के सभी दावे अधूरे और खोखले लगते हैं।
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बच्चों के खिलाफ अपराधों में तेज बढ़ोतरी
आपको बता दें कि, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सांसद ने बताया कि वर्ष 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराधों के 7,547 मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा वर्ष 2023 की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष ऐसे 6,401 मामले सामने आए थे।
उन्होंने कहा कि इन अपराधों में अपहरण, यौन शोषण, बाल हिंसा और हत्या जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। राज्य में बच्चों के खिलाफ अपराध की दर प्रति लाख जनसंख्या पर 82.8 दर्ज की गई, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। इसके बाद मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां यह दर 76.2 रही।
हत्या और अपहरण के मामलों ने बढ़ाई चिंता

बताते चलें कि, कुमारी सैलजा ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में साल 2024 के दौरान बच्चों की हत्या के 54 मामले दर्ज किए गए, जिनमें बलात्कार के बाद हत्या के छह मामले भी शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के अपहरण और अगवा करने के 2,725 मामले सामने आए, जिनमें कुल 2,805 पीड़ित शामिल थे। इनमें 530 बच्चे ऐसे थे जिन्हें लापता श्रेणी में दर्ज किया गया।
उन्होंने कहा कि यह आंकड़े बेहद भयावह हैं और राज्य सरकार के सामने कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। बच्चों के खिलाफ इस प्रकार के अपराध समाज के भविष्य पर गहरा असर डालते हैं और इन्हें रोकने के लिए ठोस रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।
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महिलाओं के खिलाफ अपराध भी लगातार बढ़ रहे
सांसद ने कहा कि हरियाणा में महिलाओं के खिलाफ अपराध पहले से ही लगातार बढ़ रहे हैं। दहेज हत्या, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और यौन अपराधों के मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल दिखाई दे रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में सख्त कानूनों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए और अपराधियों को त्वरित न्याय के माध्यम से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं और घोषणाओं से स्थिति नहीं बदलेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी
कुमारी सैलजा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज सभी को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। स्कूलों, सार्वजनिक स्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करना जरूरी है। साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ाने और संवेदनशीलता विकसित करने की भी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। इसलिए राज्य सरकार को कानून व्यवस्था सुधारने, अपराध रोकने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए तुरंत ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।










