Haryana News: हरियाणा और पंजाब की सीमा को जोड़ने वाले सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शंभू बॉर्डर पर पिछले 11 घंटों से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। अंबाला जिला पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से बंद किए गए अंबाला-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग (Ambala-Amritsar National Highway) को शाम के समय आम जनता और वाहनों के आवागमन के लिए पूरी तरह से खोल दिया है।
इस हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम की शुरुआत मंगलवार सुबह ठीक 5 बजे हुई थी, जब अंबाला पुलिस ने एहतियातन कदम उठाते हुए राजमार्ग के दोनों तरफ विशाल लोहे और कंक्रीट के बैरिकेड्स लगा दिए थे। भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए थे और दोनों राज्यों के बीच संपर्क टूट गया था। इस अचानक नाकेबंदी का मुख्य कारण पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड डील (Trade Deal) के विरोध में किया गया ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन का आक्रामक आह्वान था।
Haryana News: अनिल विज का बड़ा बयान, कांग्रेस के आंदोलन पर साधा निशाना
बसों में भरकर दिल्ली के लिए निकले थे किसान
पंजाब के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान केंद्र सरकार की नीतियों और प्रस्तावित ट्रेड डील के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए बसों, ट्रैक्टरों और अन्य निजी वाहनों में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हो चुके थे। जैसे ही हरियाणा खुफिया विभाग और अंबाला पुलिस को इस बड़े जत्थे के आगे बढ़ने की पुख्ता सूचना मिली, प्रशासन ने तुरंत शंभू बॉर्डर पर अभेद्य किलेबंदी कर दी।
जब किसानों का काफिला शंभू बॉर्डर पर पहुंचा, तो मुस्तैद पुलिस बल ने उन्हें हरियाणा की सीमा में प्रवेश करने से साफ तौर पर रोक दिया। आगे बढ़ने की अनुमति न मिलने से नाराज सैकड़ों किसान वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़कों पर ही धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते पूरा हाईवे छावनी में तब्दील हो गया और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सीमा पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण और संवेदनशील हो गई।
सरकार की तरफ से कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पहुंचे शंभू बॉर्डर
मामले की गंभीरता और हाईवे पर लगते लंबे जाम को देखते हुए हरियाणा सरकार तुरंत एक्शन मोड में आई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा स्वयं विवाद को सुलझाने और किसानों से सीधे संवाद करने के लिए शंभू बॉर्डर पर पहुंचे। वहां उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे दिग्गज किसान नेता सरवन सिंह पंधेर और अन्य प्रतिनिधियों से काफी देर तक बंद कमरे और मौके पर बातचीत की।
वार्ता के दौरान किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने सरकार के सामने प्रमुखता से दो शर्तें रखीं:
हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई: आंदोलन के मद्देनजर पुलिस द्वारा प्रशासनिक रूप से हिरासत में लिए गए सभी किसान कार्यकर्ताओं और नेताओं को तत्काल प्रभाव से मुक्त किया जाए।
केंद्रीय मंत्री से मुलाकात का आश्वासन: अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड डील के तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करने के लिए दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ उनकी एक उच्च स्तरीय आधिकारिक बैठक सुनिश्चित कराई जाए।
सरकार ने मानीं किसानों की शर्तें
राज्य के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों के रुख को देखते हुए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से मौके पर ही उनकी दोनों प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया। सरकार की तरफ से मिले इस सकारात्मक और ठोस लिखित-मौखिक आश्वासन के बाद किसान नेताओं ने अपना हाइवे जाम का आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की।
सहमति बनते ही शाम ठीक चार बजे अंबाला प्रशासन और पुलिस ने हाईवे से अपनी भारी बेरिकेडिंग को क्रेन की मदद से हटाना शुरू कर दिया। लगभग 11 घंटे तक चले इस भारी हाई-वोल्टेज ड्रामे के खत्म होने के बाद शंभू बॉर्डर पर यातायात एक बार फिर पूरी तरह सुचारू हो गया है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है।
Haryana News: CM सैनी का मास्टर प्लान, हरियाणा में ग्रीन मॉडल विकसित करने का बड़ा फैसला










