Haryana News: हरियाणा कांग्रेस के भीतर आगामी पाँच दिन सांगठनिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद उथल-पुथल भरे और महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं। पार्टी के हरियाणा मामलों के नवनियुक्त प्रभारी संजय सतीशचंद्रन दत्त पदभार संभालने के बाद पहली बार 8 से 12 जुलाई 2026 तक चंडीगढ़ के दौर पर रहेंगे। इस पांच दिवसीय प्रवास के दौरान चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (HPCC) पूरी तरह से राजनीतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बना रहेगा। इस मैराथन दौरे का मुख्य उद्देश्य पार्टी के हर स्तर के पदाधिकारियों, पूर्व व वर्तमान जनप्रतिनिधियों और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित कर संगठन की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन करना है।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक, नए प्रभारी का यह दौरा महज एक औपचारिक शिष्टाचार मुलाकात नहीं है। इसका सीधा मकसद गुटबाजी की शिकार हो चुकी राज्य इकाई को एकजुट करना, संगठन का पुनर्गठन करना और भविष्य के लिए एक अभेद्य राजनीतिक रोडमैप तैयार करना है।
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पहले दो दिन: सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों की लगेगी क्लास
संजय दत्त के इस पांच दिवसीय दौरे की शुरुआत बेहद हाई-प्रोफाइल बैठकों के साथ होगी
8 जुलाई (पहला दिन): सबसे पहले हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की जनरल बॉडी की एक साझा बैठक होगी। इसके ठीक बाद प्रभारी संजय दत्त पार्टी के सभी वर्तमान सांसदों और विधायकों (MLAs) के साथ वन-टू-वन (व्यक्तिगत) मुलाकात करेंगे। इस दौरान उनके क्षेत्रों की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, जनसंपर्क अभियानों और स्थानीय स्तर पर खड़ी चुनौतियों का कच्चा चिट्ठा लिया जाएगा।
9 जुलाई (दूसरा दिन): इस दिन जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों (जिलाध्यक्षों) के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठकें होंगी। बैठक में जिलों में चलाए जा रहे सदस्यता अभियान, ब्लॉक स्तर पर संगठन की सक्रियता और स्थानीय जातिगत व राजनीतिक समीकरणों पर गहन विचार-विमर्श कर आलाकमान को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
तीसरा और चौथा दिन: छात्र राजनीति से लेकर ‘ओपन हाउस’ में सीधे संवाद की छूट
10 जुलाई (तीसरा दिन): यह दिन मुख्य रूप से पार्टी के अग्रणी विंग (जैसे युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस और NSUI) के नाम रहेगा। इस दिन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गठित प्रदेश स्तरीय समिति की बैठक होगी। साथ ही ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की समीक्षा की जाएगी। शाम के वक्त संजय दत्त पंचकूला में नीट (NEET) पेपर लीक प्रकरण में जान गंवाने वाले छात्रों की स्मृति में निकाले जाने वाले कैंडल मार्च का नेतृत्व भी करेंगे।
11 जुलाई (चौथा दिन): इस दिन प्रदेश मुख्यालय में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक एक ‘ओपन हाउस’ का आयोजन होगा। यहाँ बिना किसी वीआईपी प्रोटोकॉल या औपचारिक प्रक्रिया के, कोई भी सामान्य कार्यकर्ता या वरिष्ठ नेता सीधे नए प्रभारी से मिलकर अपनी शिकायतें, सांगठनिक कमियाँ और सुझाव साझा कर सकेगा।
पांचवां दिन: हारे हुए उम्मीदवारों से हार के कारणों पर व्यक्तिगत चर्चा
12 जुलाई (पांचवां दिन): दौरे के आखिरी दिन प्रभारी संजय दत्त लोकसभा और हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके लेकिन पराजित हुए उम्मीदवारों से आमने-सामने बैठकर बात करेंगे। इस दौरान बूथ मैनेजमेंट की कमियों, अपनों द्वारा की गई भीतरघात (गुटबाजी), सांगठनिक कमियों और भविष्य की चुनावी तैयारियों के लिए उनसे लिखित और मौखिक फीडबैक लिया जाएगा।
नए प्रभारी संजय दत्त के सामने खड़ी हैं ये 5 बड़ी चुनौतियां
संजय दत्त के इस चंडीगढ़ दौरे को उनके लिए ‘अग्निपरीक्षा’ माना जा रहा है, क्योंकि उनके सामने कई जटिल चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं:
गुटबाजी का खात्मा: हरियाणा कांग्रेस में धड़ेबाजी जगजाहिर है। हुड्डा गुट और विरोधी गुटों के बीच संतुलन और समन्वय स्थापित करना सबसे टेढ़ी खीर होगी।
सांगठनिक संतुलन: राज्य के विभिन्न बड़े नेताओं और उनके शक्ति केंद्रों के बीच बेहतर तालमेल बनाना ताकि कोई नाराज न हो।
लंबित कार्यकारिणी का गठन: हरियाणा कांग्रेस की नई और पूर्ण कार्यकारिणी का गठन लंबे समय से अटका हुआ है, जिसे जल्द से जल्द अंतिम रूप देना होगा।
फीडबैक का सही इस्तेमाल: हारे हुए प्रत्याशियों और नेताओं से मिले फीडबैक को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उसे सांगठनिक सुधारों में तब्दील करना।
कार्यकर्ताओं में नया जोश: गुटबाजी से निराश हो चुके जमीनी कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना और उन्हें पार्टी के मुख्य नेतृत्व के साथ सीधे जोड़कर सक्रिय करना।










