Haryana News: हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन के अंदर हंगामे के साथ-साथ सदन के बाहर भी जबरदस्त सियासी टकराव देखने को मिला है। कांग्रेस विधायकों द्वारा विरोध प्रदर्शन और कथित तौर पर पोस्टर लेकर विधानसभा परिसर में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ हुए व्यवहार को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आक्रामक रुख अपना लिया है। बीजेपी ने एक वीडियो जारी कर सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस पार्टी के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
Haryana News: हरियाणा विधानसभा में तीखी बहस, कांग्रेस पर बरसे CM सैनी;
बीजेपी का वीडियो वार और सुरक्षाकर्मियों से धक्का-मुक्की
बीजेपी की ओर से जारी किए गए वीडियो में विधानसभा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और कांग्रेस विधायकों के बीच कथित तौर पर हुई धक्का-मुक्की के दृश्यों को उजागर किया गया है। बीजेपी ने सवाल उठाया है कि लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन क्या विरोध के नाम पर विधानसभा के निर्धारित नियमों, मर्यादाओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी की जानी चाहिए? पार्टी का कहना है कि विधानसभा बहस और जनहित के मुद्दों को उठाने का पवित्र मंच है, जहां नियमों का पालन करना हर जनप्रतिनिधि की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा से तीखा सवाल: ‘ये कैसा आचरण है?’
इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी सीधे तौर पर आड़े हाथों लिया है। बीजेपी ने पूछा है कि क्या विधानसभा मर्यादा का मंदिर है या अपनी धौंस दिखाने की जगह? पार्टी ने सोशल मीडिया संदेश के जरिए हुड्डा से सवाल किया कि पोस्टर लेकर नियमों के विरुद्ध परिसर में प्रवेश की कोशिश और सुरक्षाकर्मी के साथ कथित धक्का-मुक्की किस लोकतांत्रिक परंपरा के अंतर्गत आती है? इसे किसी भी स्थिति में सामान्य राजनीतिक विरोध नहीं कहा जा सकता।
‘नियम सभी के लिए समान होने चाहिए’
बीजेपी ने अपने तीखे हमलों को जारी रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि कानून और विधानसभा के नियम सभी राजनेताओं के लिए एक समान होने चाहिए। पार्टी का तर्क है कि क्या नियम केवल आम लोगों या दूसरों के लिए हैं? विरोध करना विपक्ष का लोकतांत्रिक हक है, लेकिन इसके लिए तय की गई प्रक्रियाओं का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन विधानसभा की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था को ताक पर रखकर सियासत करना कतई स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
मर्यादा बनाम आक्रामक राजनीति का नया दौर
मानसून सत्र के पहले ही दिन जिस प्रकार सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए हैं, उससे साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह सत्र बेहद हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ जहां कांग्रेस विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के विरोध के तौर-तरीकों को जनता के बीच लाकर एक नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद सदन के भीतर क्या नया मोड़ लेता है।
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