Haryana News: रेणु भाटिया के इस्तीफे से नहीं मानीं नर्सें, सार्वजनिक माफी की मांग तेज

हरियाणा महिला आयोग की पूर्व चेयरपर्सन रेणु भाटिया के विवादित बयान के बाद नर्सिंग संगठनों का विरोध लगातार जारी है।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 10, 2026

Haryana News: हरियाणा के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया का इस्तीफा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कुरुक्षेत्र के एक सरकारी अस्पताल में हुई घटना के बाद दिए गए उनके विवादित बयानों ने पूरे प्रदेश में नर्सिंग बिरादरी को आंदोलित कर दिया। भारी दबाव और देशव्यापी नर्सिंग संगठनों के कड़े विरोध के चलते, रेणु भाटिया ने मंगलवार देर रात अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सौंप दिया है।

Haryana News: भीषण गर्मी से तप रहा हरियाणा, कई जिलों में लू और तेज हवाओं की चेतावनी

विवाद की शुरुआत

यह पूरा विवाद कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल से शुरू हुआ, जहाँ एक 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ डॉक्टर द्वारा दुर्व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच के लिए जब महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया अस्पताल पहुंचीं, तो उन्होंने वहां ड्यूटी पर मौजूद नर्सों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ से तीखे सवाल किए कि उन्होंने बच्ची को डॉक्टर के साथ अकेला क्यों छोड़ा। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर बेहद अपमानजनक और तीखी भाषा का प्रयोग किया, जिसने नर्सों के आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाई।

नर्सिंग बिरादरी में रोष और ‘पेन-डाउन’ हड़ताल

नर्सिंग एसोसिएशन का तर्क है कि अस्पताल की कार्यप्रणाली में नर्सों की भूमिका इंजेक्शन रूम और वार्डों तक सीमित होती है, न कि डॉक्टर के निजी केबिन के भीतर की गतिविधियों पर निगरानी रखना। पूरी नर्सिंग बिरादरी को दोषी ठहराने और अभद्र टिप्पणी करने से आहत होकर हरियाणा के विभिन्न जिलों—जैसे कुरुक्षेत्र, कैथल, और पानीपत—में नर्सें सड़कों पर उतर आईं। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में ‘पेन-डाउन’ हड़ताल (काम बंद प्रदर्शन) की गई, जिससे ओपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के हस्तक्षेप और कुरुक्षेत्र के सीएमओ की बर्खास्तगी के बाद भी नर्सिंग स्टाफ का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

इस्तीफा मंजूर, लेकिन ‘सार्वजनिक माफी’ पर अड़ी नर्सें

अपने इस्तीफे पत्र में रेणु भाटिया ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वे भविष्य में भी महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ती रहेंगी। हालांकि, इस्तीफे के ठीक पहले उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वे अपने बयानों के लिए माफी नहीं मांगेंगी। दूसरी ओर, हरियाणा नर्सिंग फेडरेशन इस रुख से कतई संतुष्ट नहीं है। उनका साफ कहना है कि इस्तीफा देना महज एक प्रक्रिया है, लेकिन नर्सों के पेशे का अपमान करने के लिए रेणु भाटिया को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी ही होगी।

आंदोलन का भविष्य

नर्सों का आंदोलन अब केवल पद से हटाने की मांग से आगे बढ़कर व्यक्तिगत सम्मान और पेशेवर गरिमा की लड़ाई बन चुका है। फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक माफी नहीं मांगी जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि जनप्रतिनिधियों या संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को सार्वजनिक जिम्मेदारी निभाते समय अपनी भाषा की मर्यादा का कितना ख्याल रखने की आवश्यकता है।

Haryana News: हरियाणा में खेती होगी हाईटेक, खेत की मिट्टी का रियल टाइम टेस्ट होगा