Haryana News: अब इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा शहर, सेवा धाम आश्रम में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी फ्री फिजियोथैरेपी

अंबाला के साहा स्थित सेवा धाम आश्रम में सेवा ट्रस्ट यूके भारत और समाजसेवियों के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं के लिए एक अत्याधुनिक निःशुल्क फिजियोथैरेपी केंद्र की शुरुआत की गई है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 7, 2026

Haryana News: सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक घर, चूल्हे-चौके और खेतों की दोहरी जिम्मेदारियां संभालने वाली ग्रामीण महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य को सबसे पीछे रखती हैं। लगातार कड़ा शारीरिक श्रम करने के कारण गर्दन में जकड़न, असहनीय कमर दर्द, घुटनों की तकलीफ और सर्वाइकल जैसी बीमारियां उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती हैं।

परेशानी बढ़ने पर भी वे सिर्फ इसलिए डॉक्टर के पास नहीं जा पातीं क्योंकि गांवों से शहर तक का सफर आसान नहीं होता, और निजी क्लीनिकों में फिजियोथैरेपी का भारी-भरकम खर्च उनके सीमित बजट से बाहर होता है। परिणामस्वरूप, अनगिनत महिलाएं वर्षों तक इस पीड़ा को सहते हुए घरेलू नुस्खों के सहारे जीने को मजबूर रहती हैं। ऐसे विषम हालातों के बीच, अंबाला के साहा स्थित ‘सेवा धाम आश्रम’ से एक बेहद मानवीय और सराहनीय पहल की शुरुआत हुई है, जिसने ग्रामीण अंचल की महिलाओं के लिए दर्द से मुक्ति और बेहतर स्वास्थ्य की एक नई उम्मीद जगाई है।

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सेवा ट्रस्ट यूके भारत और समाजसेवियों का अनूठा प्रयास

साहा के सेवा धाम आश्रम में सेवा ट्रस्ट यूके भारत और स्थानीय समाजसेवियों के संयुक्त तत्वावधान में इस अत्याधुनिक एवं पूर्णतः निःशुल्क फिजियोथैरेपी केंद्र की स्थापना की गई है। ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार को समर्पित इस केंद्र को लगभग 20 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया है। केंद्र में इलाज के लिए विश्वस्तरीय और आधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं, जिनकी मदद से रोजाना करीब 50 महिलाओं को थेरेपी दी जा सकेगी। यहाँ आने वाली मरीजों को कुशल और अनुभवी विशेषज्ञ फिजियोथैरेपिस्ट्स की देखरेख में रखा जाएगा, जो महिलाओं की शारीरिक समस्याओं की गहराई से जांच कर उन्हें सही थेरेपी देंगे। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए महिलाओं को केवल एक बार अपना पंजीकरण (Registration) कराना होगा, जिसके बाद डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार उनका नियमित इलाज शुरू हो जाएगा।

बच्चों की सेवा के बाद अब ग्रामीण मातृशक्ति को संबल

इस परोपकारी मुहिम के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए सेवा ट्रस्ट यूके भारत के चेयरमैन नरेश मित्तल ने बताया कि उनकी संस्था पिछले कई वर्षों से ‘मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’ (DMD) जैसी लाइलाज व गंभीर जेनेटिक बीमारी से जूझ रहे मासूम बच्चों की निस्वार्थ सेवा कर रही है। सेवा धाम आश्रम में इन बच्चों के मुफ्त इलाज के साथ-साथ उनके पुनर्वास, विशेष पोषण और संपूर्ण देखभाल की पुख्ता व्यवस्था है। बच्चों की सेवा के दौरान ही संस्था के पदाधिकारियों ने महसूस किया कि ग्रामीण क्षेत्रों की गृहणियां और बुजुर्ग महिलाएं भी लंबे समय से गंभीर मस्कुलर और जॉइंट पेन (शारीरिक दर्द) से पीड़ित हैं, लेकिन पैसों और संसाधनों की कमी के चलते इलाज से महरूम हैं। इसी संवेदनशील सोच को धरातल पर उतारने के लिए इस विशेष फिजियोथैरेपी केंद्र की नींव रखी गई है।

हर दिन सुबह 9 से शाम 5 बजे तक मिलेंगी विश्वस्तरीय सेवाएं

चेयरमैन नरेश मित्तल के अनुसार, आजकल की जीवनशैली और भारी शारीरिक श्रम के कारण सर्वाइकल, साइटिका, रीढ़ की हड्डी और जोड़ों का दर्द हर उम्र की महिलाओं में तेजी से पैर पसार रहा है। गांवों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं न होने से महिलाओं को शहर के चक्कर काटने पड़ते हैं, जहाँ फिजियोथैरेपी के एक-एक सेशन के लिए सैकड़ों-हजारों रुपये वसूले जाते हैं। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की महिलाएं इस खर्च को उठाने में पूरी तरह असमर्थ होती हैं।

अब साहा के इस केंद्र में प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी। प्रत्येक मरीज की केस हिस्ट्री देखने के बाद उसके लिए 15 दिनों का एक विशेष ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया जाएगा, जिसे जरूरत के मुताबिक आगे भी बढ़ाया जाएगा। संस्था का मुख्य उद्देश्य केवल मुफ्त दवा या इलाज देना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को दर्द से परमानेंट मुक्ति दिलाकर उनके जीवन स्तर को बेहतर और खुशहाल बनाना है।

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