Haryana News: हरियाणा सरकार ने पुलिस प्रशासन को अधिक जवाबदेही और पारदर्शी बनाने के लिए हरियाणा पुलिस संशोधन अधिनियम 2026 लागू करने की मांग की है। ऐसे में नए कानून के जरिए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों की सुनवाई और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि जनता की शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान हो सकें।
नए प्रावधानों के अनुसार राज्य और जिला स्तर पर गठित पुलिस शिकायत प्राधिकरणों को व्यापक अधिकार प्रदान किए गए हैं। इन प्राधिकरणों का मुख्य उद्देश्य पुलिस से जुड़े गंभीर मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करना होगा ताकि आम नागरिकों का कानून व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत हो सके।
नर्सिंग स्टाफ की भर्ती जल्द, सीएम ने स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी लाने को कहा
छह महीने के भीतर शिकायतों का समाधान
संशोधित अधिनियम के तहत पुलिस शिकायत प्राधिकरण को प्राप्त होने वाली प्रत्येक वैध शिकायत का निपटारा छह माह के भीतर करना आवश्यक होगा। सरकार का मानना है कि समय सीमा निर्धारित होने से लंबित मामलों की संख्या कम होगी और शिकायतकर्ताओं को समय पर न्याय मिल सकेगा। इसके साथ ही कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुमनाम अथवा छद्म नाम से भेजी गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। केवल सत्यापित पहचान के साथ दर्ज कराई गई शिकायतों को ही जांच प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इससे झूठी और भ्रामक शिकायतों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
गंभीर मामलों की जांच
नए कानून के तहत पुलिस शिकायत प्राधिकरण को कई गंभीर मामलों की जांच का अधिकार दिया गया है। इनमें पुलिस हिरासत में मृत्यु, हिरासत के दौरान बलात्कार या बलात्कार का प्रयास, गंभीर शारीरिक चोट पहुंचाने के आरोप, अवैध हिरासत, कानूनी प्रक्रिया के बिना किसी व्यक्ति को बंदी बनाना तथा मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा उगाही, दबाव बनाकर संपत्ति हासिल करने, संगठित अपराध में पुलिसकर्मियों की संभावित संलिप्तता और ऐसे मामलों में जानबूझकर बरती गई लापरवाही की भी जांच की जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस बल के भीतर किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि को नजरअंदाज न किया जाए।
जिला और राज्य स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां
संशोधित अधिनियम के अनुसार जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण को निरीक्षक स्तर तक के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच करने का अधिकार दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद यह प्राधिकरण संबंधित विभाग को आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकेगा। वहीं, उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारियों से जुड़े मामलों की सुनवाई और जांच राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में होगी। इससे शिकायतों के स्तर के अनुसार उनकी सुनवाई सुनिश्चित की जा सकेगी और जांच प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी।
Malviya Nagar fire incident: 21 मौतों से देश स्तब्ध, PM मोदी ने की सहायता राशि की घोषणा
अन्य संस्थाओं में लंबित मामलों में नहीं होगा हस्तक्षेप
कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई मामला पहले से किसी न्यायालय, मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग, अनुसूचित जाति आयोग या लोकायुक्त के समक्ष विचाराधीन है, तो पुलिस शिकायत प्राधिकरण उसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। यह प्रावधान विभिन्न संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए शामिल किया गया है।
जनता को मिलेगा त्वरित और निष्पक्ष न्याय
हरियाणा सरकार का यह नया कदम पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समयबद्ध शिकायत निस्तारण, स्वतंत्र जांच और स्पष्ट अधिकारों के माध्यम से यह कानून पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा। इससे आम जनता को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए अधिक प्रभावी मंच उपलब्ध होगा और कानून व्यवस्था में लोगों का विश्वास और मजबूत होने की उम्मीद है।










