Hariyana News: महिलाओं में तेजी से बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर के बीच गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) ने एक नई पहल शुरू की है। फार्मास्युटिकल साइंस विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रेखा राव और गुरुग्राम स्थित डीपीजी यूनिवर्स कॉलेज की डॉ. वर्षा मिलकर हर्बल आधारित नैनो-जैल विकसित करने पर काम कर रही हैं। इस जैल का उद्देश्य शुरुआती स्तर पर कैंसर कोशिकाओं की पहचान और लक्षित उपचार को सरल बनाना है।
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नैनो-जैल तकनीक क्या है
यह जैल नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित होगी। इसका सिद्धांत है कि दवा सीधे प्रभावित हिस्से पर केंद्रित होकर काम करे। वर्तमान उपचार में दवाओं की अधिक मात्रा से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। नैनो-जैल तकनीक दवा को लक्षित हिस्से तक सीमित रखेगी। इससे कैंसर कोशिकाओं पर सीधा असर होगा और साइड इफेक्ट कम होंगे।
हल्दी का सक्रिय तत्व ‘कुरकुमिन’
इस शोध में हल्दी से प्राप्त कुरकुमिन का उपयोग किया जा रहा है। यह हर्बल तत्व कैंसर कोशिकाओं पर प्रभावी माना जाता है। हर्बल बेस होने के कारण इसके दुष्प्रभाव कम रहने की संभावना है। जैल को त्वचा पर लगाने योग्य रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि सीधे प्रभावित हिस्से पर उपयोग किया जा सके।
हरियाणा में ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति
हरियाणा में हर साल लगभग 8 से 10 हजार नए मामले सामने आते हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और हिसार जैसे शहरी क्षेत्रों में मामलों की संख्या बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली, तनाव, खानपान और जागरूकता की कमी प्रमुख कारण हैं। अधिकांश महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी तीसरे या चौथे चरण में सामने आती है।
शोध का उद्देश्य
शुरुआती स्तर पर कैंसर की पहचान आसान बनाना। लक्षित उपचार से दवा का असर सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचाना। साइड इफेक्ट कम करना और मरीजों को सुरक्षित विकल्प देना। शोध पूरा होने पर इसका पेटेंट कराया जाएगा।
जीजेयू और डीपीजी यूनिवर्स कॉलेज का यह संयुक्त शोध कैंसर उपचार में नई दिशा दिखा सकता है। हल्दी आधारित नैनो-जैल से न केवल उपचार अधिक प्रभावी होगा बल्कि मरीजों को कम दुष्प्रभाव झेलने पड़ेंगे। यह शोध महिलाओं में बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर मामलों के बीच उम्मीद की नई किरण है।










