Haryana News: हरियाणा के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक, 657 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। सीबीआई की विस्तृत रिपोर्ट में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रिभव रिषी को इस सुनियोजित षड्यंत्र का मुख्य ‘मास्टरमाइंड’ करार दिया गया है। जांच से पता चला है कि बैंक के भीतर मौजूद कुछ अधिकारियों ने बाहरी सहयोगियों के साथ मिलकर सरकारी विभागों के खातों को निशाना बनाया और एक जटिल जाल बुनकर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी को अंजाम दिया।
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बैंकिंग प्रणाली से खिलवाड़
आरोपियों ने धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए। सीबीआई के अनुसार, ब्रांच मैनेजर रिभव रिषी, रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार और उनके सहयोगियों ने फर्जी डेबिट नोट, नकली हस्ताक्षरित चेक और बिना किसी वैध चेक के अनधिकृत डेबिट एंट्रीज का सहारा लिया। इन अवैध लेनदेन को बैंक के आंतरिक “मेकर-चेकर” सिस्टम के माध्यम से ही स्वीकृति दिलाई गई, ताकि वे पूरी तरह वैध और पारदर्शी नजर आएं।
इस घोटाले की परतें तब और गहरी होती गईं, जब जांच में पता चला कि बैंक की अनिवार्य सुरक्षा प्रक्रियाएं महज एक औपचारिकता बनकर रह गई थीं। बड़े लेनदेन के लिए आवश्यक ‘कॉल वेरिफिकेशन’ की प्रक्रिया को या तो पूरी तरह नजरअंदाज किया गया या गलत व्यक्तियों से पुष्टि करवाकर उसे पूरा दिखा दिया गया। इसके अलावा, खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी को बदलकर आरोपियों के नियंत्रण वाले नंबरों से लिंक कर दिया गया, जिससे किसी भी तरह का ओटीपी या ट्रांजेक्शन अलर्ट असली खाताधारकों तक नहीं पहुंच सका।
सरकारी खातों को बनाया निशाना
सीबीआई ने विभिन्न सरकारी विभागों के साथ हुई धोखाधड़ी के कई उदाहरण साझा किए हैं:
एचपीजीसीएल (HPGCL) घोटाला: 5 मई 2025 को हरियाणा पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन के खाते से 50 करोड़ रुपये एक ऐसे चेक के माध्यम से निकाले गए, जिसे विभाग ने कभी जारी ही नहीं किया था। इसी तरह 19 मई को बिना किसी चेक के 5 करोड़ रुपये का अंतरण कर दिया गया।
पेंशन फंड में सेंध: 29 दिसंबर 2025 को एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट के 25 करोड़ रुपये एक शेल कंपनी ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ में ट्रांसफर किए गए। इस मामले में एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
अन्य विभाग: हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड से 10 करोड़, हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब होने और नगर निगम पंचकूला के खाते से 22 फर्जी डेबिट ट्रांजेक्शन करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।
जांच का दायरा और निष्कर्ष
जांच एजेंसी ने पाया कि यह घोटाला केवल कुछ फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बैंकिंग सिस्टम, सुरक्षा मानकों और आंतरिक नियंत्रण तंत्र के साथ की गई एक सोची-समझी छेड़छाड़ थी। सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और शेल कंपनियों के तार खंगालने में जुटी है। यह मामला न केवल बैंक की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि सरकारी धन की सुरक्षा के लिए कड़े नियंत्रण तंत्र की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
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