Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में उद्योगों और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार के अनुपालन में कमी (कंप्लायंस रिडक्शन) और डी-रेग्यूलेशन अभियान के तहत राज्य ने अपने निर्धारित 28 प्राथमिकता वाले सुधारों में से 21 को सफलतापूर्वक मंजूरी दे दी है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ हरियाणा अब देश के उन अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने सुधारों को तेजी से जमीन पर उतारा है।
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मुख्य सचिव की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक और निर्देश
इस पूरी प्रक्रिया की प्रगति का जायजा लेने के लिए राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए कि वे बाकी बचे हुए सुधारों को भी तय समय-सीमा के भीतर सख्ती से लागू करें। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि इन सुधारों से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज समय पर एमआईएस (MIS) पोर्टल पर अपलोड किए जाएं, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा की इन उपलब्धियों का सटीक रिकॉर्ड दर्ज हो सके।
मुख्य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा मजबूत और आधुनिक नियामक ढांचा तैयार करना है, जो पूरी तरह से पारदर्शी हो, तकनीक पर आधारित हो और उद्योगों की जरूरतों के अनुकूल हो। ऐसा होने से प्रदेश में भारी मात्रा में नया निवेश आकर्षित होगा, स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार सुगमता) की रैंकिंग में हरियाणा और भी मजबूत स्थिति में पहुंचेगा।
निरीक्षण व्यवस्था और प्रक्रियाओं का सरलीकरण
समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी साझा की गई कि केंद्र सरकार के डी-रेग्यूलेशन सेल ने पहले ही छह प्रमुख सुधारों पर अपनी मुहर लगा दी है। इन सुधारों में बिजली नया कनेक्शन लेने की प्रक्रिया को बेहद आसान बनाना, दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से जुड़े नियमों का उदारीकरण करना, सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए समयबद्ध सरकारी सेवाएं देना शामिल है। इसके अलावा, हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत ऑटो-अपील प्रणाली को मजबूत करना, पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना और विशेष रूप से एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए निरीक्षण व्यवस्था को और अधिक सुगम व पारदर्शी बनाना इसमें शामिल है।
दूसरी ओर, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि अन्य 15 महत्वपूर्ण सुधारों पर भी बहुत तेजी से काम चल रहा है। इनमें भूमि उपयोग (CLU) नियमों का उदारीकरण, भवन निर्माण से जुड़ी स्वीकृतियों का सरलीकरण, औद्योगिक प्लॉटों के प्रबंधन में लचीलापन, वैश्विक मानकों के आधार पर अग्नि सुरक्षा नियम, स्वास्थ्य क्षेत्र के लाइसेंस को आसान बनाना तथा राज्य के सभी पुराने कानूनों व नियमों का डिजिटलीकरण करना प्रमुख रूप से शामिल है।
तीन साल की छूट और नए कानूनों का प्रावधान
बैठक में यह भी घोषणा की गई कि ‘हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक-2026’ का मसौदा पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इस नए प्रस्तावित कानून के तहत पात्र विनिर्माण एमएसएमई इकाइयों को केवल स्व-घोषणा के आधार पर ही सैद्धांतिक स्वीकृति प्रमाण-पत्र मिल जाएगा और उन्हें सरकारी निरीक्षणों से पूरे तीन साल तक की छूट का बड़ा प्रावधान दिया जाएगा। साथ ही, हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (HEPC) को राज्य स्तर की नोडल एजेंसी बनाकर सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से सभी मंजूरियों को समय पर सुनिश्चित किया जाएगा। इन तमाम सुधारों से हरियाणा के औद्योगिक विकास को एक नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है।
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