Haryana News: हरियाणा में सरकारी विभागों को आदेश, जरूरी जानकारी खुद करें सार्वजनिक

डॉ. अजय कुमार सूरा ने कहा कि धारा-4 का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। विभाग यदि जानकारी खुद सार्वजनिक करें तो आरटीआई आवेदनों की संख्या घटेगी और नागरिकों व विभागों दोनों का समय बचेगा।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 1, 2026

Haryana News: हरियाणा में सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी और जनता के लिए सुलभ बनाने की दिशा में राज्य सूचना आयोग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अक्सर देखा गया है कि आम नागरिक को छोटी-छोटी जानकारियों के लिए भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन करना पड़ता है। इस स्थिति को बदलने के लिए हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सभी सरकारी विभागों को आरटीआई कानून की मूल भावना को पुनर्जीवित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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आयोग का स्पष्ट निर्देश

राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए विभागों को स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार कानून का वास्तविक उद्देश्य केवल आवेदन मिलने पर जानकारी मुहैया कराना नहीं है। इसके विपरीत, इस कानून की धारा-4 यह अनिवार्य बनाती है कि प्रत्येक सरकारी विभाग अपने कामकाज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां स्वतः ही सार्वजनिक करे।

आयोग के अनुसार, यह विभागों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है कि वे जनता की सुविधा के लिए पहले से ही तमाम जरूरी सूचनाएं वेबसाइट या अन्य सार्वजनिक माध्यमों पर उपलब्ध कराएं। यदि विभाग धारा-4 के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से करें, तो नागरिकों को सामान्य जानकारी के लिए अलग से आरटीआई लगाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

क्या-क्या जानकारी सार्वजनिक करनी होगी?

आदेश में आयोग ने उन प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट किया है जिन्हें विभागों को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल स्वरूप में व्यवस्थित करना होगा:

संगठनात्मक ढांचा: विभाग के भीतर अधिकारियों की जिम्मेदारियां और पदानुक्रम की स्पष्ट सूची।

निर्णय लेने की प्रक्रिया: नियमों, कायदों और प्रक्रियाओं का विवरण, ताकि जनता को पता हो कि निर्णय कैसे लिए जा रहे हैं।

बजट और वित्त: विभाग का बजट, आवंटित राशि, विभिन्न योजनाओं पर खर्च और सब्सिडी से जुड़ी विस्तृत जानकारी।

कर्मचारी विवरण: अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची व उनके वेतनमान संबंधी जानकारी।

योजनाएं और परमिट: विभाग द्वारा संचालित की जा रही तमाम योजनाएं, उनके लाभार्थियों की सूची और परमिट से जुड़ी शर्तें।

सुशासन की ओर एक बड़ा कदम

डॉ. अजय कुमार सूरा ने जोर देकर कहा कि सूचना को छिपाकर रखने के बजाय उसे समय पर सार्वजनिक करना ही सुशासन (Good Governance) की असली पहचान है। उन्होंने कहा कि धारा-4 का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) को बढ़ाना है।

यदि सभी सरकारी विभाग इस आदेश का प्रभावी ढंग से पालन करते हैं, तो इसके तीन बड़े सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे:

अनावश्यक बोझ में कमी: आरटीआई आवेदनों की संख्या में भारी गिरावट आएगी, जिससे विभागों का कीमती समय बचेगा।

नागरिकों का लाभ: आम जनता का समय और धन दोनों बचेगा, क्योंकि उन्हें आवेदन शुल्क और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।

विश्वास की बहाली: प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आने से जनता का सरकार पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा।

आयोग का यह आदेश राज्य प्रशासन के लिए एक चेतावनी और एक अवसर दोनों है, ताकि वे अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाकर सूचना को एक गोपनीय वस्तु के बजाय एक सार्वजनिक अधिकार के रूप में देखें।

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