Haryana News: हरियाणा का बड़ा स्वास्थ्य रिकॉर्ड, शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट 2024 के अनुसार, हरियाणा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य की शिशु मृत्यु दर (IMR) अब घटकर 24 प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर आ गई है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 6, 2026

Haryana News: हरियाणा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट 2024 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, राज्य में शिशु मृत्यु दर (IMR) अब प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर घटकर 24 रह गई है। यह सुधार न केवल हरियाणा की स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि राज्य को राष्ट्रीय औसत के समकक्ष खड़ा करता है। पिछले एक दशक में 41 से 24 तक का यह सफर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में किए गए निरंतर निवेश और समर्पण का परिणाम है।

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सुधार की गति और तुलनात्मक आंकड़े

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो हरियाणा की शिशु मृत्यु दर 28 से घटकर 24 पर आ गई है, जो कि लगभग 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट है। स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, यह उपलब्धि तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब हम हरियाणा की बड़ी और घनी जनसंख्या को देखते हैं। जहां उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में शिशु मृत्यु दर अभी भी 35-36 के आसपास बनी हुई है, वहीं हरियाणा ने अपनी जनसंख्या चुनौतियों के बावजूद बेहतर प्रदर्शन किया है।

सफलता के मुख्य स्तंभ

शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा सरकार ने एक व्यापक और एकीकृत स्वास्थ्य मॉडल अपनाया है। इस सफलता के पीछे राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं:

विशिष्ट देखभाल इकाइयां: राज्य भर में स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (SNCUs), न्यूबॉर्न स्टेबिलाइज़ेशन यूनिट्स (NBSUs) और न्यूबॉर्न बेबी केयर कॉर्नर्स (NBCCs) की स्थापना की गई है।

एकीकृत देखभाल: कंगारू मदर केयर (KMC), कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर्स (CLMCs) और हाइब्रिड HDU-ICU यूनिट्स ने नवजात शिशुओं की उत्तरजीविता दर में सुधार किया है।

संस्थागत प्रसव को बढ़ावा: सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल में डिलीवरी को प्राथमिकता दी गई है, जिससे प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को कम करने में मदद मिली है।

माँ और बच्चे की सुरक्षा: प्रसव-पूर्व देखभाल से लेकर घर पर नवजात शिशु की देखभाल तक, सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाया है।

भविष्य की राह

राज्य सरकार अब इस प्रगति को और तेज करने के लिए तैयार है। मौजूदा SNCUs को ‘मैटरनल एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स’ (MNCUs) में अपग्रेड किया जा रहा है, ताकि माताओं और शिशुओं को एक ही स्थान पर एकीकृत उपचार मिल सके। इसके अतिरिक्त, राज्य के उन ग्रामीण इलाकों और पूर्वी हरियाणा के कुछ हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां शिशु मृत्यु दर अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

डॉ. सुमिता मिश्रा का मानना है कि आने वाले वर्षों में, यदि इसी गति से स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण जारी रहा, तो हरियाणा न केवल राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन करेगा, बल्कि शिशुओं के जीवन को बचाने के मामले में एक मॉडल राज्य बनकर उभरेगा। यह प्रयास सुनिश्चित करेगा कि हर बच्चा सुरक्षित रहे और स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ाए।

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