Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के शहरी और पालिका क्षेत्रों से सटे इलाकों में जमीन के फर्जीवाड़े और अवैध कॉलोनियों के पनपने पर लगाम कसने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने ‘हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (संशोधन) विधेयक 2026’ के तहत नई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब शहरों के पास स्थित जमीन की अदला-बदली (Land Exchange) के लिए सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
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क्यों पड़ी इस संशोधन की आवश्यकता?
पंजीकरण अधिकारियों के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई जगहों पर लोग ‘जमीन की अदला-बदली’ (Exchange Deed) की आड़ में बड़ा खेल कर रहे थे। लोग छोटे भूखंडों को बदलकर कहीं अधिक मूल्यवान या बड़े भूखंड हथिया रहे थे। कानूनी भाषा में इसे अदला-बदली कहा जाता था, लेकिन वास्तव में यह अप्रत्यक्ष रूप से जमीन की खरीद-फरोख्त थी। इस प्रक्रिया के जरिए अधिनियम की धारा-7क (Section 7-A) के नियमों को दरकिनार किया जा रहा था, जिससे शहरी क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों के निर्माण को बढ़ावा मिल रहा था। इसी फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने 30 जनवरी 2026 से अध्यादेश के माध्यम से कानून में संशोधन लागू किया है।
क्या हैं नए कानूनी प्रावधान?
हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 की धारा-7 में किए गए इस संशोधन के अनुसार, अब किसी भी अधिसूचित शहरी क्षेत्र में एक एकड़ से कम भूमि का हस्तांतरण करना आसान नहीं होगा।
अनिवार्य अनुमति: एक एकड़ से कम भूमि की अदला-बदली के लिए अब नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशक या संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC): पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा-17 के अंतर्गत किसी भी अदला-बदली विलेख (Exchange Deed) के पंजीकरण से पूर्व अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
संशोधित शब्दावली: कानून की धारा 7-ए में ‘पट्टे’ (Lease) शब्द के साथ ‘या विनिमय विलेख’ (Exchange Deed) को भी जोड़ दिया गया है, ताकि अदला-बदली के माध्यम से होने वाली अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
अवैध कॉलोनियों पर लगेगी लगाम
सरकार का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को रोकना है जो नियमों की खामियों का फायदा उठाकर अधिसूचित क्षेत्रों में अनियोजित तरीके से निर्माण करते हैं। वर्ष 1975 के इस अधिनियम में बदलाव करके अब यह सुनिश्चित किया गया है कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के कोई भी व्यक्ति या संस्था सस्ती जमीन देकर महंगी जमीन नहीं ले पाएगी।
यह कदम न केवल जमीन के अवैध लेन-देन को हतोत्साहित करेगा, बल्कि राज्य के शहरी नियोजन (Urban Planning) को भी सुव्यवस्थित करेगा। यद्यपि बजट सत्र में पारित विधेयक अभी राज्यपाल की औपचारिक सहमति की प्रतीक्षा में है, लेकिन 30 जनवरी से लागू अध्यादेश ने राज्य में जमीनों के पंजीकरण की प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी और सख्त बना दिया है। आम जनता और निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी जमीन की अदला-बदली का पंजीकरण करवाने से पहले विभागीय दिशा-निर्देशों का भली-भांति पालन करें, अन्यथा उनके दस्तावेज अमान्य हो सकते हैं।
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