Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास और उद्यमियों को बड़ी राहत देते हुए एक दूरदर्शी निर्णय लिया है। सरकार ने उन सभी औद्योगिक कॉलोनियों और क्लस्टरों के नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) के लिए एक नई और व्यापक नीति को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है, जो लंबे समय से बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे थे। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा लागू की गई इस नीति के माध्यम से राज्यभर में फैली हजारों अवैध या अनधिकृत औद्योगिक इकाइयों को अब कानूनी मान्यता मिलने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है।
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नीति की मुख्य शर्तें और पात्रता के मानक
इस नई रेगुलराइजेशन नीति का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट और पारदर्शी मानक तय किए हैं। इसके तहत कम से कम 10 एकड़ के क्षेत्रफल में फैली और न्यूनतम 50 औद्योगिक इकाइयों वाली कॉलोनियां ही इस योजना के दायरे में आ सकेंगी। इसके अतिरिक्त, यह भी अनिवार्य किया गया है कि संबंधित औद्योगिक कॉलोनी का विकास और स्थापना 3 अक्टूबर 2025 से पहले हो चुकी हो। इस नीति का मुख्य उद्देश्य इन उपेक्षित क्षेत्रों में आधुनिक बुनियादी ढांचा और आवश्यक नागरिक सुविधाएं सुनिश्चित करना है।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेजों की अनिवार्यता
नीति के सुचारू क्रियान्वयन के लिए एक सरल और पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था बनाई गई है। इसके तहत प्रत्येक औद्योगिक कॉलोनी के लिए एक “अधिकृत व्यक्ति (ऑथराइज्ड पर्सन)” की नियुक्ति की जाएगी, जो क्षेत्र के सभी उद्यमियों और इकाइयों की तरफ से पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत करेगा। आवेदन प्रक्रिया के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण दस्तावेज जमा करने होंगे:
कॉलोनी का विस्तृत लेआउट प्लान और सर्वे मैप
भूमि के स्वामित्व से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज
इकाइयों में उत्पादन शुरू होने के प्रमाण और लीज डीड
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) की अनिवार्य सहमति
फायर एनओसी और वैध फैक्ट्री लाइसेंस
इन सभी दस्तावेजों के ऑनलाइन प्राप्त होने के बाद, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक द्वारा इनकी प्रारंभिक जांच की जाएगी। दस्तावेज सही पाए जाने पर आवेदन को आगे की नियमितीकरण प्रक्रिया के लिए स्वीकार कर लिया जाएगा।
बजट घोषणा और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पहल
यह निर्णय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा राज्य के बजट 2025 में की गई घोषणाओं का ही परिणाम है। सरकार का मुख्य विजन अनधिकृत रूप से चल रहे इन औद्योगिक क्षेत्रों में पक्की सड़कें, सीवरेज नेटवर्क, पेयजल आपूर्ति, निर्बाध बिजली और अन्य महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं का तीव्र गति से विकास करना है। इसके लिए कानूनी रूप से “हरियाणा मैनेजमेंट ऑफ सिविक अमेनिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेफिशिएंट एरियाज आउटसाइड म्युनिसिपल एरिया (स्पेशल प्रोविजंस) संशोधन अधिनियम, 2025” के तहत प्रावधान किए गए थे, जिसे 3 अक्टूबर 2025 को अधिसूचित किया गया था।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
इस नीति के लागू होने से न केवल हरियाणा के समग्र औद्योगिक विकास को अभूतपूर्व गति मिलेगी, बल्कि वर्षों से अनिश्चितता के साए में काम कर रहे हजारों उद्यमियों को बड़ी राहत मिलेगी। कानूनी मान्यता मिलने से निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और राज्य में रोजगार के नए अवसरों के सृजन का मार्ग भी सुगम होगा।
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