Haryana News: हरियाणा सरकार प्रदेश के सभी नागरिकों को शुद्ध, सुरक्षित और उच्च गुणवत्तायुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है। दूध, दही, दाल, तेल, मसाले, मिठाइयों और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं में मिलावट रोकने के लिए खाद्य नमूनों की जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। हाल ही में लोकसभा में प्रस्तुत किए गए केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य में खाद्य सुरक्षा की निगरानी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का तंत्र बेहद सक्रिय रूप से काम कर रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो।
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हरियाणा में लगातार हो रही सैंपलिंग और सख्त कार्रवाई
राज्य में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता परखने के लिए नियमित रूप से नमूने लिए जा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
वर्ष 2025-26: हरियाणा में कुल 2,335 खाद्य सैंपलों की जांच की गई, जिनमें से 723 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे (गैर-अनुरूप पाए गए)। इन मामलों में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 1,424 सिविल मामलों के तहत जुर्माना लगाया गया, जबकि 116 आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि दर्ज की गई।
पिछले वर्षों का रुझान: यह सिलसिला काफी समय से जारी है। वर्ष 2024-25 में 2,233 में से 500, 2023-24 में 3,485 में से 856 और 2022-23 में 4,445 में से 1,425 सैंपल मानकों के विपरीत पाए गए थे।
इन आंकड़ों से साफ है कि खाद्य सुरक्षा विभाग केवल नमूना लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्ता के मानकों का उल्लंघन मिलने पर सख्त कानूनी और आर्थिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है।
खाली पदों को भरने और लैब नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और सुचारू बनाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन का होना बेहद आवश्यक है। वर्तमान स्थिति यह है कि हरियाणा में स्वीकृत 45 फूड सेफ्टी ऑफिसर के पदों में से 22 पद फिलहाल रिक्त पड़े हैं। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार जल्द ही इन रिक्त पदों को भर देती है, तो बाजारों में निरीक्षण, सैंपलिंग और त्वरित कार्रवाई की क्षमता में कई गुना इजाफा होगा।
इसके साथ ही, देश और प्रदेश स्तर पर फूड टेस्टिंग लैब्स के नेटवर्क को अत्याधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में FSSAI से मान्यता प्राप्त 259 फूड टेस्टिंग लैब और 24 रेफरल लैब देश में उपलब्ध हैं। कुछ प्रयोगशालाओं में भारी धातुओं (Heavy Metals), कीटनाशक अवशेषों और सूक्ष्मजीवों (Microbiological) की जांच से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए आधुनिक उपकरण और तकनीकी सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।
डार्क स्टोर और डिजिटल खाद्य आपूर्ति भी निगरानी के दायरे में
आज के डिजिटल युग में क्विक-कॉमर्स (Quick-Commerce) का चलन तेजी से बढ़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ ‘डार्क स्टोर’ (Dark Stores) में रखे जाने वाले खाद्य पदार्थों को भी कड़े खाद्य सुरक्षा नियमों के दायरे में शामिल कर लिया है। इन स्टोर्स पर तापमान नियंत्रण (Temperature Control), उचित भंडारण व्यवस्था, स्वच्छता, पेस्ट कंट्रोल, कर्मचारियों की व्यक्तिगत हाइजीन और खाद्य पदार्थों की ट्रेसबिलिटी को अनिवार्य किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार बदलते वक्त के साथ डिजिटल आपूर्ति तंत्र पर भी पैनी नजर रख रही है।
गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं
संक्षेप में कहें तो, मिलावटखोरों पर लगाम कसने के लिए हरियाणा सरकार अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत करने की तैयारी में है। सैंपलिंग बढ़ाने, आधुनिक जांच तकनीकों को अपनाने और नियम तोड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई करने के जरिए प्रदेशवासियों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—खाद्य पदार्थों की शुद्धता और गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।
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