Haryana News: हरियाणा में लंपी वायरस का कहर, एक गाय की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट

हरियाणा में करीब 15 दिन पहले दस्तक देने वाली लंपी स्किन डिसीज अब घातक साबित हो रही है। राज्य में संक्रमण से पहली पशु मौत का मामला सामने आया है, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 5, 2026

Haryana News: हरियाणा राज्य में करीब दो हफ्ते पहले दोबारा दस्तक देने वाले घातक ‘लंपी स्किन डिसीज’ (Lumpy Skin Disease) ने अब अपना खतरनाक रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य में इस वायरल संक्रमण से पशुओं की मौत का पहला मामला सामने आने के बाद पशुपालकों और प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया है। महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल के पास स्थित गांव हुडीना में एक उच्च नस्ल की दुधारू गाय, जो रोजाना 15 लीटर दूध देती थी, इस बीमारी की चपेट में आ गई और इलाज के दौरान उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से स्थानीय पशुपालकों में भारी दहशत का माहौल है।

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नारनौल में सबसे ज्यादा संक्रमण, 97 पशु बीमार

प्रभावित पशुपालक जिले सिंह ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उनकी एक गाय ने संक्रमण के चलते दम तोड़ दिया है, जबकि उनकी दूसरी गाय भी इस वायरस से बुरी तरह संक्रमित है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे हरियाणा प्रदेश में अब तक लंपी वायरस के 100 से अधिक सक्रिय मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें अकेले नारनौल जिले में ही 97 पशु इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। चूंकि महेंद्रगढ़ जिला तीन तरफ से पड़ोसी राज्य राजस्थान की सीमाओं से घिरा हुआ है, इसलिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर पशुओं के आवागमन और अवैध खरीद-फरोख्त के कारण इस संक्रमण के तेजी से फैलने का खतरा और अधिक बढ़ गया है।

भिवानी के बहल क्षेत्र में भी फैला संक्रमण

नारनौल के अलावा भिवानी जिले के बहल क्षेत्र और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लंपी वायरस के नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे पशु चिकित्सा विभाग की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर विकास ने इस बीमारी के लक्षणों के बारे में बताते हुए कहा कि संक्रमित पशुओं के शरीर पर अचानक तेज बुखार के साथ गांठें (नोड्यूल) उभरने लगती हैं और बाद में बड़े व गहरे घाव बन जाते हैं।

प्रशासनिक चौकसी और टीकाकरण अभियान तेज

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग ने सीमावर्ती और प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग द्वारा प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है ताकि स्वस्थ पशुओं को इस संक्रमण से बचाया जा सके। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने सभी पशुपालकों को सख्त सलाह दी है कि वे अपने मवेशियों की विशेष देखभाल करें। किसी भी पशु में लक्षण दिखाई देते ही उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें, बाड़े के आसपास मक्खी और मच्छरों की रोकथाम के लिए उचित उपाय करें और बिना देर किए नजदीकी पशु अस्पताल से संपर्क कर समय पर उचित इलाज सुनिश्चित करें।

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