Haryana News: शिक्षा और खेलों के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाला कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय इन दिनों खेल व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। विश्वविद्यालय में जहां एक ओर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने और खेल संस्कृति को मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय में करीब 52 खेल विधाएं संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल 6 खेलों के लिए ही पर्याप्त कोच उपलब्ध हैं।
ऐसे हालात में खिलाड़ियों की तैयारी और उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। बिना प्रशिक्षित कोच के खिलाड़ी किस तरह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार करेंगे, यह बड़ा सवाल बन गया है।
Haryana News: UAE में नौकरी का मौका, NOON कंपनी भारतीय युवाओं को दे रही डिलीवरी राइडर जॉब
प्रशिक्षकों की भारी कमी
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एयर राइफल शूटिंग, एयर पिस्टल शूटिंग, तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, कबड्डी, कुश्ती और योगा सहित कई खेल विधाएं शामिल हैं। कुल मिलाकर विश्वविद्यालय में 52 खेलों की व्यवस्था बताई जाती है, लेकिन इन सभी खेलों के लिए कोचिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है।
खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए नियमित अभ्यास, तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ कोच की भूमिका बेहद अहम होती है। खासकर शूटिंग, तीरंदाजी, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स और कुश्ती जैसे खेलों में बिना कोच के खिलाड़ी अपनी क्षमता को सही दिशा नहीं दे पाते। ऐसे में कोचों की कमी खिलाड़ियों की प्रतिभा को प्रभावित कर सकती है।
दावों और हकीकत में दिख रहा अंतर
सरकारें और संस्थान अक्सर मंचों से खिलाड़ियों को देश का भविष्य बताते हैं। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे भी किए जाते हैं। लेकिन विश्वविद्यालय स्तर पर खेल विभाग की मौजूदा स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती है।
जब किसी बड़े विश्वविद्यालय में 52 खेलों के लिए सिर्फ 6 कोच हों, तो यह साफ दिखता है कि खेल व्यवस्था को लेकर गंभीरता की कमी है। खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कागजी उपलब्धियों और रैंकिंग तक सीमित नजर आता है, जबकि मैदानों में खिलाड़ियों को जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
खिलाड़ियों को मिल रहा अधूरा प्रशिक्षण
खेल विभाग से जुड़ी जानकारी और विद्यार्थियों के अनुसार मौजूदा स्थिति में कई खिलाड़ियों को केवल औपचारिक प्रशिक्षण ही मिल पा रहा है। जिन खेलों में कोच उपलब्ध नहीं हैं, वहां खिलाड़ी खुद के अनुभव या वरिष्ठ खिलाड़ियों की मदद से अभ्यास करने को मजबूर हैं।
कई खिलाड़ियों का कहना है कि तकनीकी खेलों में छोटी-छोटी गलतियां भी प्रदर्शन पर बड़ा असर डालती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ कोच का न होना उनके करियर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। खिलाड़ियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि मैदान में सुविधाओं की कमी साफ दिखती है, लेकिन प्रशासन की ओर से इस पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
स्थायी और अस्थायी कोचों की व्यवस्था जरूरी
विश्वविद्यालय में खेलों को बेहतर बनाने के लिए स्थायी कोचों की नियुक्ति बेहद जरूरी मानी जा रही है। जहां स्थायी कोच तुरंत उपलब्ध न हों, वहां अस्थायी या अनुबंध आधार पर प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जा सकती है। इससे खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास और सही मार्गदर्शन मिल सकेगा।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विश्वविद्यालय वास्तव में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करना चाहता है, तो उसे खेल विभाग को मजबूत करना होगा। सिर्फ खेलों की संख्या बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर खेल के लिए प्रशिक्षक, उपकरण और अभ्यास की बेहतर सुविधा भी देनी होगी।
CM रेखा गुप्ता समेत मंत्री घर से कर रहे काम, सचिवालय में पसरा सन्नाटा
खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की यह स्थिति खिलाड़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा मुद्दा है। अगर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सही समय पर उचित प्रशिक्षण नहीं मिला, तो उनकी क्षमता दबकर रह सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जल्द से जल्द कोचों की कमी दूर करने और खेल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।










