Haryana News: करोड़ों की अस्पताल परियोजना में धांधली, PWD ने SDO समेत 3 इंजीनियरों को किया सस्पेंड

हरियाणा के नागरिक अस्पताल परिसर में ₹138.12 करोड़ की लागत से बन रहे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (MCH) में घटिया निर्माण और तकनीकी लापरवाही का बड़ा खुलासा हुआ है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 20, 2026

Haryana News: देश में बुनियादी ढांचे के विकास के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है। नागरिक अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (MCH) परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर बरती गई गंभीर अनियमितताओं पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने तकनीकी मानकों की अनदेखी और लापरवाही के सीधे आरोप में एक उपमंडल अभियंता (SDO) और दो कनिष्ठ अभियंताओं (JE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।

इस कार्रवाई की सबसे खास और चर्चा का विषय बनी बात यह है कि निलंबित किए गए एसडीओ अपने सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बेहद करीब थे, लेकिन उससे ठीक पहले उन पर गाज गिर गई।

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करोड़ों की परियोजना और शुरुआती शिकायतें

नागरिक अस्पताल परिसर में क्षेत्र की महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से करीब 138.12 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक सात मंजिला अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। इतनी बड़ी और संवेदनशील परियोजना होने के बावजूद, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही इसमें इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर लगातार गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय स्तर पर और विभागीय गलियारों में यह चर्चा आम थी कि अस्पताल की इमारत के निर्माण में मानकों के साथ समझौता किया जा रहा है।

क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी की जांच में खुली पोल

लगातार मिल रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए ‘क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी’ की एक राज्य स्तरीय उच्च टीम ने मार्च महीने में अचानक निर्माण स्थल का औचक निरीक्षण किया। इस जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उसने विभाग के पैरों तले जमीन खिसका दी। जांच टीम ने पाया कि सात मंजिला इस बेहद संवेदनशील भवन की नींव (Foundation) और कॉलम से जुड़े मुख्य कार्यों में स्थापित तकनीकी मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की गई थी।

निरीक्षण टीम ने कंक्रीट निर्माण की प्रक्रिया, घटिया सामग्री के उपयोग और बुनियादी सुरक्षा मानकों से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर गंभीर खामियां दर्ज कीं। मामले की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए निर्माण स्थल से सामग्रियों के नमूने (Samples) एकत्र किए गए और उन्हें प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया। 14 मई को सरकार को सौंपी गई विस्तृत और अंतिम रिपोर्ट में गुणवत्ता संबंधी इन गंभीर कमियों की पूरी तरह से पुष्टि हो गई, जिसके बाद सरकार और विभाग ने कड़ा एक्शन लेने का मन बना लिया।

निलंबन की कार्रवाई और मुख्यालय से संबद्ध

इंजीनियर-इन-चीफ कार्यालय के कड़े निर्देशों पर लोक निर्माण विभाग ने 26 मई को निलंबन के आधिकारिक आदेश जारी कर दिए। विभागीय आदेशों के अनुसार, डिवीजन नंबर-2 में कार्यरत एसडीओ (SDO) दिलबाग मेहरा, जेई (JE) दीपक मलिक और जेई (JE) सचिन को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान इन तीनों अधिकारियों को उनके मौजूदा पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है।

रिटायरमेंट से ठीक पहले लगा बड़ा झटका

इस पूरी विभागीय कार्रवाई का सबसे तगड़ा और दूरगामी झटका उपमंडल अभियंता (एसडीओ) दिलबाग मेहरा को लगा है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिलबाग मेहरा इसी वर्ष अगस्त महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले थे। इतना ही नहीं, वह अपनी नौकरी के सेवा विस्तार (सर्विस एक्सटेंशन) के लिए भी उच्च स्तर पर आवेदन कर चुके थे और इसके लिए पूरी पैरवी कर रहे थे। लेकिन रिटायरमेंट से महज कुछ महीने पहले हुए इस निलंबन ने उनके सेवा विस्तार की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है और उनके करियर के अंतिम पड़ाव पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का एक बड़ा दाग लगा दिया है। विभाग अब इस मामले में आगे की विस्तृत अनुशासनात्मक और कानूनी जांच की तैयारी कर रहा है।

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