Haryana News: अनाज मंडियों में किसानों से अवैध वसूली का आरोप, हरियाणा सरकार को नोटिस

हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों से लिए जा रहे अतिरिक्त शुल्क को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दावा है कि नियमों के बावजूद किसानों की रकम काटी जा रही थी। अब सरकार को कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिससे पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

अनाज मंडियों में किसानों से अवैध वसूली का आरोप

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 21, 2026

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Haryana News: हरियाणा की अनाज मंडियों में किसानों से कथित रूप से अवैध शुल्क वसूले जाने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार को कानूनी नोटिस जारी किया गया है। आरोप है कि सरकारी नियमों के बावजूद कुछ मंडियों में किसानों से निर्धारित शुल्क से अधिक राशि ली जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मामले ने एक बार फिर मंडी व्यवस्था और किसानों के अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है।

पूर्व कृषि वैज्ञानिक ने उठाई आवाज

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने इस मामले को गंभीर बताते हुए हरियाणा सरकार को कारण बताओ नोटिस भिजवाया है। यह नोटिस एक वरिष्ठ अधिवक्ता के माध्यम से 19 अगस्त 2026 को भेजा गया। डॉ. लाठर का कहना है कि मंडियों में किसानों से ऐसे शुल्क लिए जा रहे हैं, जिनकी अनुमति सरकारी नियमों में नहीं है। उनका आरोप है कि किसानों को जानकारी के अभाव में अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है, जबकि संबंधित नियम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि सरकारी खरीद के दौरान उनसे कौन-कौन से शुल्क लिए जा सकते हैं और कौन से नहीं।

नियम क्या कहते हैं?

डॉ. लाठर के अनुसार, हरियाणा सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट उल्लेख है कि आढ़ती किसानों से केवल 20 पैसे प्रति क्विंटल की दर से नीलामी शुल्क वसूल सकते हैं। यह शुल्क न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली सरकारी खरीद प्रक्रिया के लिए निर्धारित किया गया है। इसके अलावा किसानों से किसी अन्य प्रकार का मजदूरी शुल्क या आकस्मिक शुल्क लेना नियमों के विरुद्ध माना जाता है। बावजूद इसके, कई मंडियों में किसानों से अतिरिक्त राशि लिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

कच्ची पर्ची पर रोक के बाद भी जारी वसूली

राज्य सरकार द्वारा पहले ही कच्ची पर्ची व्यवस्था पर रोक लगाई जा चुकी है ताकि किसानों के साथ किसी प्रकार की अनियमितता न हो। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ आढ़ती अलग-अलग नामों से किसानों से अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह राशि कभी आकस्मिक शुल्क तो कभी अन्य मदों के नाम पर ली जाती है। इससे किसानों को उनकी फसल की बिक्री पर मिलने वाली वास्तविक आय में कमी आती है और उनकी लागत का बोझ बढ़ जाता है।

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नोटिस में सरकार से क्या मांग की गई?

सरकार को भेजे गए नोटिस में मांग की गई है कि अनाज मंडियों में किसानों से की जा रही कथित अवैध वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों से केवल वही शुल्क लिया जाए जो नियमों के तहत निर्धारित हैं। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि इस प्रकार की वसूली जारी रहती है तो यह किसानों के आर्थिक हितों को प्रभावित करेगी और सरकारी खरीद व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होंगे।

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किसानों के हितों की सुरक्षा पर जोर

डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर का कहना है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनधिकृत वसूली पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में मंडियों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।