Haryana News: कुत्तों की नसबंदी से हेल्पलाइन तक, हाईकोर्ट ने मांगा पूरा हिसाब

हरियाणा में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से 28 सवालों का विस्तृत जवाब मांगा है। नसबंदी, टीकाकरण, आश्रय स्थल और हेल्पलाइन व्यवस्था तक की जानकारी तलब की गई है। आखिर सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं और अदालत क्यों सख्त हुई है, जानिए पूरा मामला।

कुत्तों की नसबंदी से हेल्पलाइन तक

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 11, 2026

Haryana News: हरियाणा में बढ़ती आवार कुत्तों की समस्या को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार और शहरी स्थानीय निकाय विभाग को इस मुद्दे पर की गई तैयारियों और व्यवस्थाओं को पूरा ब्यौरा अदालत के समक्ष पेश करना होगा। हाईकोर्ट ने 7 अगस्त तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने यह जानने की कोशिश की है कि प्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

28 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी

आपको बता दें कि, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित और निकायों से 28 अलग-अलग बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है। इन सवालों का उद्देश्य यह समझना है कि स्थानीय प्रशासन ने कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण, आश्रय स्थलों और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर कितनी तैयारी की है। इन सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार कर अदालत को सौंपनी होगी, ताकि भविष्य की कार्ययोजना को और प्रभावी बनाया जा सके।

छह महीने के कार्यों का देना होगा हिसाब

राज्य के 87 शहरी निकायों से 1 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 तक की गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड मांगा जाएगा। इस अवधि के दौरान आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने, पकड़ने, नसबंदी कराने और टीकाकरण से जुड़े सभी कार्यों का विवरण रिपोर्ट में शामिल करना होगा। सरकार को यह भी बताना होगा कि पिछले छह महीनों में इस दिशा में कितना काम हुआ और उसके क्या परिणाम सामने आए।

नसबंदी और टीकाकरण पर रहेगा विशेष फोकस

अदालत ने कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन से संबंधित व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया है। निकायों को यह बताना होगा कि उनके पास कितने प्रशिक्षित कर्मचारी और पशु चिकित्सक उपलब्ध हैं, जो इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इसके अलावा यह भी जानकारी देनी होगी कि बीते छह महीनों में कितने कुत्तों की नसबंदी की गई और कितनों का टीकाकरण हुआ।

आश्रय स्थलों की स्थिति पर भी मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने जिलों में संचालित पशु आश्रय स्थलों और प्रस्तावित केंद्रों की स्थिति पर भी जानकारी मांगी है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि आवारा कुत्तों को रखने के लिए कितने केंद्र मौजूद हैं और उनकी क्षमता कितनी है। यदि किसी क्षेत्र में ऐसे केंद्र नहीं हैं, तो वहां भविष्य में क्या योजना बनाई गई है, इसका विवरण भी देना होगा।

निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था की होगी समीक्षा

कुत्तों को पकड़ने और उनके प्रबंधन के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों की जानकारी भी अदालत को देनी होगी। साथ ही निरीक्षण और निगरानी के लिए बनाए गए तंत्र की कार्यप्रणाली का पूरा ब्यौरा भी प्रस्तुत करना होगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन कितना प्रभावी ढंग से हो रहा है।

विभागों के बीच तालमेल की जानकारी भी जरूरी

हाईकोर्ट ने विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सरकार को यह बताना होगा कि शहरी निकाय, पशुपालन विभाग और अन्य एजेंसियां किस प्रकार मिलकर इस समस्या से निपटने के लिए काम कर रही हैं। साथ ही भविष्य की कार्ययोजना और उसके क्रियान्वयन की रणनीति भी साझा करनी होगी।

बजट और चुनौतियों पर भी देनी होगी रिपोर्ट

अदालत ने यह भी पूछा है कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए कितना बजट जारी किया गया है और उसके उपयोग की स्थिति क्या है। इसके अलावा कार्यों के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान की जानकारी भी देनी होगी।

आगे की रणनीति पर रहेगी नजर

हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार और शहरी निकायों को व्यापक रिपोर्ट तैयार करनी होगी। अदालत इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्ययोजना और आवश्यक निर्देश तय कर सकती है। आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए यह कदम प्रदेश में बेहतर प्रबंधन और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।