Haryana News: हरियाणा में जलभराव पर हाईटेक एक्शन, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

प्रदेश सरकार ने इस साल 1.40 लाख एकड़ भूमि को जलभराव (सेम) की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पहली बार वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए सैटेलाइट के जरिए नियमित निगरानी की व्यवस्था की जा रही है, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 4, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने और ‘विजन-2047’ के तहत प्रदेश को देश का अग्रणी कृषि राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में कृषि विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करते हुए खेती को आधुनिक, किफायती और लाभदायक बनाने पर विशेष जोर दिया। इस योजना के तहत जल प्रबंधन से लेकर उर्वरक उपयोग तक में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

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पहली बार सैटेलाइट मॉनिटरिंग

हरियाणा के कई क्षेत्रों में लंबे समय से जलभराव (सेम) की समस्या किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। इसे दूर करने के लिए सरकार ने इस वर्ष 1.40 लाख एकड़ भूमि को इस समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहली बार इस प्रक्रिया में वैज्ञानिक पद्धतियों और सैटेलाइट आधारित निगरानी का उपयोग किया जाएगा। सैटेलाइट तकनीक के जरिए जलभराव वाले क्षेत्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे सुधार कार्यों की गति और सटीकता में भारी वृद्धि होगी।

उर्वरकों का संतुलित उपयोग और सॉयल हेल्थ कार्ड

कृषि की लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए सरकार ने मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। प्रदेश में 15 लाख ‘सॉयल हेल्थ कार्ड’ जारी करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए पहले चरण में 3.75 लाख मिट्टी के नमूनों का संग्रह किया जाना है। अब तक 50,620 नमूने एकत्र भी किए जा चुके हैं।

साथ ही, जिन जिलों में यूरिया की खपत अत्यधिक है, वहां मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट का गहरा अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि फसलों को नाइट्रोजन की कितनी वास्तव में आवश्यकता है। इससे किसान अनावश्यक उर्वरकों पर होने वाला खर्च बचा सकेंगे और मिट्टी की सेहत भी सुरक्षित रहेगी।

जैविक खेती और मंडियों का आधुनिकीकरण

प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक ठोस ढांचा तैयार किया है। राज्य के 10 जिलों में जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत हिसार और गुरुग्राम में जैविक उत्पादों के लिए समर्पित मंडियां स्थापित की जाएंगी, जबकि आठ अन्य जिलों की मंडियों में इनके लिए अलग स्थान आरक्षित किए जाएंगे। यह किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर बाजार मूल्य दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

पराली प्रबंधन और कृषि आधुनिकीकरण

मुख्यमंत्री ने पराली जलाने की समस्या को जड़ से समाप्त करने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर दिया गया है। कुल मिलाकर, यह रोडमैप किसानों की मेहनत को कम करने, लागत घटाने और आय बढ़ाने पर केंद्रित है। आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार पहुंच और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के मेल से हरियाणा का किसान अब नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। सरकार का यह विजन न केवल कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि पर्यावरण के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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