Haryana News: हजारों पूर्व सैनिकों को मिलेगा फायदा, हाई कोर्ट ने पेंशन पर दिया बड़ा फैसला

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक अहम फैसले ने हजारों पूर्व सैनिकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। दिव्यांगता पेंशन को लेकर आए इस निर्णय को ऐतिहासिक माना जा रहा है। आखिर अदालत ने ऐसा क्या कहा जिससे पूर्व सैनिकों को बड़ा लाभ मिल सकता है, जानिए पूरी खबर।

हजारों पूर्व सैनिकों को मिलेगा फायदा

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 6, 2026

Haryana News: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सैनिक को भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ और चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया था, लेकिन सेवा के दौरान उसे कोई बीमारी या शारीरिक समस्या हो जाती है, तो सामान्य परिस्थितियों में उसे सैन्य सेवा से जुड़ा माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल मेडिकल बोर्ड की राय के आधार पर सैनिकों को उनके वैधानिक अधिकारों और पेंशन लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

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केंद्र सरकार की याचिका हुई खारिज

यह फैसला भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट जोगेंद्र सिंह से जुड़े मामले में सुनाया गया। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने सशस्त्र बल अधिकरण (AFT) द्वारा दिए गए उस आदेश को भी बरकरार रखा, जिसमें संबंधित सैनिक को दिव्यांगता पेंशन देने का निर्देश दिया गया था।

भर्ती के समय फिट पाए गए सैनिकों को मिलेगा लाभ

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब कोई व्यक्ति सेना में भर्ती होता है और उसे पूरी तरह फिट घोषित किया जाता है, तो बाद में सेवा के दौरान उत्पन्न होने वाली बीमारियों या दिव्यांगताओं को सामान्य रूप से सेवा से संबंधित माना जाना चाहिए। अदालत का मानना है कि सैन्य सेवा के दौरान सैनिकों को कठिन परिस्थितियों, मानसिक दबाव और शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बाद में उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

केवल मेडिकल बोर्ड की राय पर्याप्त नहीं

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सैनिक के अधिकारों का निर्धारण केवल मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर नहीं किया जा सकता। यदि परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि बीमारी या दिव्यांगता सेवा के दौरान विकसित हुई है, तो सैनिक को उसका वैधानिक लाभ मिलना चाहिए। यह टिप्पणी उन मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां कई पूर्व सैनिकों को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर पेंशन लाभों से वंचित किया गया था।

हजारों पूर्व सैनिकों को मिल सकती है राहत

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला देशभर के हजारों पूर्व सैनिकों के लिए राहत लेकर आया है। कई मामलों में तकनीकी कारणों या नियमों की कड़ी व्याख्या के चलते दिव्यांगता पेंशन के दावे खारिज कर दिए जाते थे। अब इस निर्णय के बाद ऐसे मामलों में सैनिकों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी आधार मिलेगा।

सैनिकों के हितों की सुरक्षा पर जोर

अदालत के इस फैसले ने यह संदेश भी दिया है कि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले जवानों के अधिकारों और कल्याण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सेवा के दौरान उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उन्हें उचित सहायता और आर्थिक सुरक्षा मिलना आवश्यक है।

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ऐतिहासिक फैसले का व्यापक प्रभाव

यह निर्णय भविष्य में आने वाले समान मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि सैन्य सेवा के दौरान होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को केवल प्रशासनिक या तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।