Haryana News: मानसून ब्रेक के बाद हरियाणा में होगी झमाझम बारिश, IMD का ताजा पूर्वानुमान

हरियाणा में 17 से 20 जुलाई के बीच मानसून एक बार फिर से सक्रिय होने जा रहा है, जिसका व्यापक असर सूबे में 19 जुलाई के बाद देखने को मिलेगा।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 15, 2026

Haryana News: हरियाणा के मौसम में इन दिनों काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कहीं हल्की बूंदाबांदी हो रही है तो कहीं लोग भीषण उमस और गर्मी से बेहाल हैं। हाल ही में एक सक्रिय हुई पश्चिमी मौसम प्रणाली के प्रभाव के चलते मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों जैसे रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल और मेवात में तेज रफ्तार हवाओं के साथ छिटपुट बारिश और हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। इसके बावजूद, राज्य के शेष हिस्सों में लोग उमस भरी भीषण गर्मी की चपेट में हैं और पसीने से तर-बतर हो रहे हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अब हरियाणा में अगले चार दिनों तक मानसून पर पूरी तरह से ब्रेक (Mansoon Break) लगा रहेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि 19 जुलाई से मौसम के मिजाज में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आने वाला है। 19 से 25 जुलाई के दौरान पूरे सूबे में मानसूनी हवाएं एक बार फिर जोर पकड़ेंगी, जिससे राज्य भर में झमाझम और भारी बारिश होने की प्रबल संभावना बन रही है।

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क्यों कमजोर पड़ा मानसून? अल-नीनो और जलवायु परिवर्तन का असर

मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, वर्तमान में हरियाणा और उसके आस-पास के क्षेत्रों में मौसम की मिली-जुली परिस्थितियां बनी हुई हैं। इस समय पूरे इलाके में मानसून ब्रेक की स्थिति साफ तौर पर देखी जा सकती है। दरअसल, मानसून की जो मुख्य रेखा (Mansoon Trough) होती है, वह इस समय खिसककर हिमालय के तराई क्षेत्रों (तराई बेल्ट) की तरफ सक्रिय हो गई है।

मानसून टर्फ के उत्तर की ओर चले जाने के कारण हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों में मानसून बेहद कमजोर पड़ गया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार मानसूनी गतिविधियों में आ रहे इस व्यवधान के पीछे वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और प्रशांत महासागर में बनी अल-नीनो (El-Nino) की परिस्थितियां एक अत्यंत महत्वपूर्ण और नकारात्मक भूमिका निभा रही हैं।

उमस भरी गर्मी से जनता त्रस्त

प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पिछले कई दिनों से लगातार और व्यापक बारिश न होने के कारण लोगों को मानसून के सीजन का अहसास ही नहीं हो रहा है। इसके विपरीत, अरब सागर और पाकिस्तान की तरफ से आ रही लगातार मजबूत और शुष्क पश्चिमी हवाओं के कारण दिन के तापमान में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।

तापमान बढ़ने के साथ ही, बीच-बीच में चलने वाली दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हवाएं वातावरण में मौजूद नमी को बढ़ा रही हैं। शुष्क पश्चिमी हवाओं और नमी युक्त दक्षिणी हवाओं के इस अजीब मिश्रण की वजह से संपूर्ण हरियाणा और एनसीआर क्षेत्र में आम जनता को बेहद कष्टदायक और उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। लोग इस चिपचिपी गर्मी से राहत पाने के लिए बादलों के बरसने की राह देख रहे हैं।

19 जुलाई के बाद फिर लौटेगा मानसून

हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए यहां के किसानों को इस समय फसलों की सिंचाई के लिए बारिश का सबसे ज्यादा और बेसब्री से इंतजार है। धान की रोपाई और अन्य खरीफ फसलों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है। इससे पहले सोमवार को सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, जींद, रोहतक, झज्जर और सोनीपत जैसे जिलों में धूल भरी आंधी, तेज हवाओं के साथ हल्की फुल्की बारिश की गतिविधियां जरूर देखी गई थीं, जिससे अस्थाई राहत मिली थी।

मौसम विभाग के नए पूर्वानुमानों के अनुसार, 17 जुलाई के आसपास मानसूनी हवाएं एक बार फिर करवट लेंगी और 20 जुलाई तक यह प्रणाली पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगी। इस मौसमी बदलाव का व्यापक असर हरियाणा में 19 जुलाई की रात या 20 जुलाई की सुबह से स्पष्ट रूप से दिखने लगेगा। मौसम वैज्ञानिकों ने अनुमान जताया है कि 19 जुलाई से लेकर 25 जुलाई तक राज्य के लगभग सभी जिलों में मूसलाधार और झमाझम बारिश का दौर चलेगा, जो न केवल आम जनता को गर्मी से निजात दिलाएगा बल्कि सूख रही फसलों और चिंतित किसानों के लिए भी एक बड़ी संजीवनी साबित होगा।

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