Haryana News: हरियाणा सरकार ने दिव्यांगजनों के हित में एक अहम और सराहनीय कदम उठाया है। सरकार ने फैसला लिया है कि अब प्रदेश में 40 प्रतिशत से 99 प्रतिशत तक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को हरियाणा रोडवेज की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाएगी। इस निर्णय से राज्य के करीब 1.22 लाख दिव्यांगजन सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।
इस संबंध में राज्य परिवहन विभाग ने वित्त विभाग से आवश्यक परामर्श लेने के बाद आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का यह कदम सामाजिक समावेशन और दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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पहले क्या थी व्यवस्था?
इससे पहले हरियाणा में केवल 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को ही मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान की जाती थी। वर्ष 2007 में इस योजना की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत पूर्ण दिव्यांग व्यक्ति अपने एक सहायक के साथ मुफ्त में यात्रा कर सकते थे। बाद में वर्ष 2010 में इस सुविधा का दायरा बढ़ाते हुए इसे चंडीगढ़ और दिल्ली तक भी लागू किया गया। हालांकि, 100 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले लोगों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पाता था, जिससे वे लंबे समय से सरकार से इस नियम में बदलाव की मांग कर रहे थे।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?
अब सरकार के नए फैसले के बाद 40 प्रतिशत से 99 प्रतिशत तक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को भी मुफ्त यात्रा का अधिकार मिल जाएगा। इससे उन हजारों लोगों को राहत मिलेगी, जो पहले इस सुविधा से वंचित थे। इस निर्णय के बाद दिव्यांगजन अपने दैनिक कार्यों, नौकरी, शिक्षा या अन्य जरूरी कामों के लिए आसानी से यात्रा कर सकेंगे। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि यात्रा पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।
परिवहन विभाग की भूमिका और प्रयास
राज्य परिवहन विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, हरियाणा रोडवेज पहले से ही लगभग 40 विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों को मुफ्त या रियायती यात्रा सुविधा प्रदान कर रहा है। सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों के लोगों को सुलभ और किफायती परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि यह फैसला दिव्यांगजनों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि प्रदेश में परिवहन सेवाएं सुरक्षित, सुलभ और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हों।
सामाजिक समावेशन की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का यह निर्णय न केवल दिव्यांगजनों को आर्थिक राहत देगा, बल्कि उन्हें समाज में अधिक आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करेगा। इससे वे बिना किसी आर्थिक चिंता के अपनी जरूरतों के लिए यात्रा कर सकेंगे।









