Haryana News: हरियाणा के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हजारों कच्चे, आउटसोर्स और अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से वेतन भुगतान में हो रही देरी की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। NHM प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब सभी कच्चे कर्मचारियों को हर महीने की तय तारीख यानी 7 तारीख तक अनिवार्य रूप से वेतन का भुगतान कर दिया जाए। इस फैसले से कर्मचारियों को समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी और उन्हें हर महीने वेतन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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क्यों उठाया गया यह कदम?

विभाग द्वारा यह सख्त कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पूर्व में कई बार निर्देश देने के बावजूद मैदानी स्तर पर कर्मचारियों का वेतन समय पर नहीं मिल पा रहा था। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई थी कि वेतन मिलने में देरी का मुख्य कारण समय पर बिलों का जमा न होना और उनकी प्रोसेसिंग (प्रक्रिया) में होने वाली सुस्ती है। अधिकारियों की इसी लाचारी और प्रशासनिक देरी को खत्म करने के लिए NHM ने अब एक फिक्स टाइमलाइन (समयसीमा) तय कर दी है, जिससे हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा सकेगी।
तय की गई नई समयसीमा और अधिकारियों की जिम्मेदारियां

वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश और जिम्मेदारियां तय की गई हैं, डायरेक्टर फाइनेंस एंड अकाउंट्स की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर महीने की 25 तारीख तक प्रदेश के हर जिले में वेतन वितरण के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध हो। साथ ही, इसकी जानकारी मिशन निदेशक, NHM को भी देनी होगी।
डायरेक्टर एडमिन, डीडीओ (DDO) और डीडी बिल शाखा को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे एचकेआरएनएल (HKRNL), एनएचएम कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े सभी वेतन बिल समय पर जमा करवाएं और उनकी फाइलें बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाएं।
हर महीने की 7 तारीख तक हर हाल में कर्मचारियों के खातों में सैलरी पहुंच जानी चाहिए। इसके अगले दिन यानी 8 तारीख तक वेतन वितरण की पूरी स्थिति की रिपोर्ट मिशन निदेशक को सौंपनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया की देखरेख डायरेक्टर फाइनेंस एंड अकाउंट्स और स्टेट फाइनेंस मैनेजर करेंगे।
लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
NHM हरियाणा के मिशन निदेशक की मंजूरी के बाद जारी किए गए इस आदेश में साफ कर दिया गया है कि यदि अब तय समयसीमा के बाद वेतन भुगतान में कोई भी देरी पाई जाती है, तो इसे बहुत गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
इसके साथ ही, कार्यालय के कामकाज में तेजी लाने के लिए फाइलों और पीयूसी (PUC) को राज्य सरकार के ऑफिस प्रोसीजरल मैनुअल में तय समयसीमा के भीतर ही निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के लागू होने से प्रदेशभर के हजारों कच्चे कर्मचारियों को बड़ी आर्थिक स्थिरता और मानसिक राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
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