Haryana News: हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने यमुना नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक और बहुआयामी कार्ययोजना तैयार की है। सरकार का ध्यान केवल नदी की मुख्य धारा तक सीमित न रहकर, उससे जुड़ी सहायक नदियों, नालों, स्थानीय जल निकायों और तटीय गांवों से निकलने वाले सीवेज, औद्योगिक कचरे (Industrial Effluents) और ठोस अपशिष्ट (Solid Waste) के पूर्ण निस्तारण पर है।
मंगलवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई यमुना कार्य योजना (Yamuna Action Plan) की समीक्षा बैठक में सभी संबंधित परियोजनाओं की समयसीमा तय की गई और लंबित कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए गए।
Haryana News: हरियाणा की वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी? 44.84 लाख रिकॉ
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजनाओं पर विशेष जोर
यमुना में घरेलू सीवेज को गिरने से रोकने के लिए राज्य के चार प्रमुख शहरों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत में नए एसटीपी और अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है।
गुरुग्राम: धनवापुर (100 MLD), बहरामपुर (100 MLD), नौरंगपुर (40 MLD) और सेक्टर-107 (100 MLD) में क्षमता वाले चार प्रमुख एसटीपी प्रस्तावित हैं, जिनकी टेंडर प्रक्रिया अगस्त-सितंबर में पूरी हो जाएगी।
फरीदाबाद: मिर्जापुर में 20 MLD क्षमता के एसटीपी का काम 30 अगस्त तक शुरू करने का लक्ष्य है, जबकि सूरजकुंड में 20 MLD संयंत्र की तकनीकी निविदाएं 24 अगस्त तक खोली जाएंगी।
सोनीपत व पानीपत: कुंडली (सोनीपत) में 7.5 MLD और समालखा (पानीपत) में 4 MLD क्षमता के संयंत्रों पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
औद्योगिक अपशिष्ट पर नकेल और साझा उपचार संयंत्र (CETP)
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले विषैले रसायन और अपशिष्ट जल को रोकने के लिए सरकार कई कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) स्थापित कर रही है।
फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में 50 MLD क्षमता के साझा संयंत्र के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं।
गुरुग्राम सेक्टर-34 में 20 MLD, बादशाहपुर में 15 MLD और सेक्टर-37 में 9 MLD क्षमता के उपचार संयंत्रों की समीक्षा कर प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
13 जल स्रोतों का कायाकल्प और तटीय गांवों में थ्री-पोंड सिस्टम
यमुना से जुड़े स्थानीय जल स्रोतों (वाटर बॉडीज) में प्रदूषण रोकने के लिए फरीदाबाद, करनाल, पानीपत और सोनीपत के 13 प्रमुख जल स्रोतों (19.12 हेक्टेयर क्षेत्र) को चिन्हित किया गया है। इनके पुनरुद्धार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2027 निर्धारित किया गया है।
यमुना किनारे बसे गांवों के गंदे पानी को साफ करने के लिए सोनीपत, करनाल और पानीपत में थ्री-पोंड सिस्टम (Three-Pond System) और छोटे एसटीपी लगाए जाएंगे।
कचरे से बनेगी बिजली
ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) के तहत 33 शहरी स्थानीय निकायों को शामिल किया गया है। कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करने और उससे ऊर्जा बनाने के लिए तीन बड़े बायोगैस प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 650 टन प्रतिदिन होगी:
राई-जाखौली (सोनीपत): 400 टन प्रतिदिन (निर्माण शुरू)
यमुनानगर: 150 टन प्रतिदिन (तकनीकी समीक्षा जारी)
मोहना-बल्लभगढ़ (फरीदाबाद): 100 टन प्रतिदिन (DPR तैयार)
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यमुना में एक बूंद भी बिना उपचारित (Untreated) पानी या औद्योगिक कचरा न पहुंचे।
Haryana News: बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर बड़ा अपडेट, अनिल विज ने










