Hariyana News: हरियाणा में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के माध्यम से लिंगानुपात में सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन हाल ही में सामने आए आंकड़े एक चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। विशेष रूप से सिरसा जिले और प्रदेश के अन्य कुछ हिस्सों में जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) में आई गिरावट ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है।
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सिरसा जिले के आंकड़ों में गिरावट
वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों की रिपोर्ट के अनुसार, सिरसा जिले में लिंगानुपात की स्थिति पिछले वर्षों की तुलना में कमजोर हुई है। अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले का लिंगानुपात घटकर 883 पर आ गया है। गौरतलब है कि फरवरी और मार्च के महीनों में यह आंकड़ा 900 के संतोषजनक स्तर पर बना हुआ था, लेकिन महज एक महीने के भीतर 17 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई।
जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच सिरसा में कुल 5548 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें लड़कों की संख्या 2947 रही, जबकि लड़कियों की संख्या केवल 2601 दर्ज की गई। यह अंतर दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर अभी भी काफी काम किया जाना बाकी है।
चरखी दादरी सबसे निचले पायदान पर
लिंगानुपात के मामले में हरियाणा के विभिन्न जिलों के बीच भारी असमानता देखने को मिली है। एक ओर जहां करनाल (969), कुरुक्षेत्र (932), फरीदाबाद (930) और पलवल (923) जैसे जिले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं सिरसा और चरखी दादरी जैसे जिले पिछड़ गए हैं।
सबसे भयावह स्थिति चरखी दादरी की है, जहां लिंगानुपात गिरकर 768 के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा न केवल प्रशासनिक विफलता की ओर संकेत करता है, बल्कि सामाजिक चेतना पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।
अवैध नेटवर्क और विभाग की कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि ‘प्री-कंसेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स’ (PCPNDT) एक्ट के तहत की जा रही सख्त निगरानी के बावजूद कुछ संदिग्ध नेटवर्क सक्रिय हैं। सिरसा में पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में की गई जांच में मेडिकल स्टोरों के माध्यम से एमटीपी (गर्भपात) किट और दवाइयों की अवैध बिक्री के मामले पकड़े गए हैं।
विभाग का मानना है कि चोरी-छिपे किए जा रहे लिंग परीक्षण और अवैध गर्भपात ही इस गिरावट के मुख्य कारण हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब अपनी रणनीति बदलने का निर्णय लिया है।
भविष्य की कार्ययोजना और सामाजिक जागरूकता
गिरते आंकड़ों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन अब और अधिक कड़े कदम उठाने की तैयारी में है। आगामी दिनों में निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं—
सघन निगरानी: निजी अस्पतालों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की औचक जांच और रिकॉर्ड का बारीकी से मिलान।
डिकॉय ऑपरेशन: संदिग्ध केंद्रों को पकड़ने के लिए गुप्त अभियानों (डिकॉय ऑपरेशंस) में तेजी लाना।
दवाइयों पर लगाम: एमटीपी किट की बिक्री करने वाले मेडिकल स्टोरों का नियमित ऑडिट।
अंततः, प्रशासन का यह मानना है कि केवल कानूनी सख्ती से इस बुराई को खत्म नहीं किया जा सकता। कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए सामाजिक जागरूकता और लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना अनिवार्य है। जब तक समाज में बेटियों को बेटों के समान दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक ऐसे अभियानों की सफलता पूर्ण नहीं मानी जा सकती।










