Haryana News: भारत सरकार ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की ओर अग्रसर है। केंद्रीय विद्युत एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ’12वें इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक (IESW-2026)’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ और 2070 तक ‘नेट-जीरो’ कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगा।
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ऊर्जा की बढ़ती मांग और भंडारण की अनिवार्यता
मंत्री ने स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से बढ़ते चलन के कारण देश में बिजली की खपत में भारी उछाल आया है। मई 2026 में बिजली की पीक डिमांड 271 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है, जबकि देश की वर्तमान उत्पादन क्षमता करीब 284 गीगावाट है। आने वाले समय में यह मांग 300 गीगावाट को पार कर सकती है। इसे देखते हुए, केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत भंडारण तंत्र विकसित करना अनिवार्य हो गया है।
आत्मनिर्भरता पर जोर: ‘देश से बड़ा कुछ नहीं’
मनोहर लाल ने स्वदेशी विनिर्माण को राष्ट्र के लिए सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि “देश से बड़ा कुछ नहीं है।” उन्होंने बैटरी और ऊर्जा उपकरणों के घरेलू उत्पादन पर जोर देते हुए आह्वान किया कि भारत को आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। भले ही शुरुआत में स्वदेशी तकनीक थोड़ी महंगी लगे, लेकिन भविष्य में यही भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी और उत्पादन लागत में भारी कमी लाएगी। उन्होंने उद्योग जगत को आश्वासन दिया कि नई तकनीकों के अनुसंधान और विकास (R&D) में सरकार हर संभव सहयोग करेगी।
वैश्विक ऊर्जा ग्रिड का विजन
सरकार की दृष्टि केवल घरेलू आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है। भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिजली व्यापार की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है। मंत्री ने जानकारी दी कि भारत और यूएई के बीच 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1,600 किलोमीटर लंबी ‘अंडरसी पावर केबल’ (समुद्र के नीचे बिजली ट्रांसमिशन) बिछाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। यह परियोजना भारत के ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ विजन को साकार करेगी। भविष्य में श्रीलंका, सिंगापुर और यहां तक कि यूरोप तक बिजली व्यापार का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सरकार पूर्व से पश्चिम तक एक एकीकृत वैश्विक ग्रिड बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
भविष्य का रोडमैप
8 से 10 जुलाई तक आयोजित इस कार्यक्रम में 15 देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया, जहाँ हरित हाइड्रोजन, स्मार्ट ग्रिड और बैटरी रीसाइक्लिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर मंथन किया गया। मनोहर लाल ने विश्वास व्यक्त किया कि ऊर्जा सुरक्षा, अत्याधुनिक तकनीक और वैश्विक कनेक्टिविटी का मेल भारत को ऊर्जा महाशक्ति बनाएगा। यह रोडमैप न केवल भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि विश्व स्तर पर भी एक जिम्मेदार और प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में भारत का ऊर्जा मॉडल तकनीक, स्थिरता और आत्मनिर्भरता के इर्द-गिर्द घूमेगा।










