Haryana News: हरियाणा के महम से पूर्व विधायक बलराज कुंडू ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कुंडू ने दावा किया है कि उन्हें कुख्यात ‘रोहित गोदारा गैंग’ से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, जिसके कारण उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था का नए सिरे से आकलन किया जाए और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे सुरक्षित रह सकें।
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व्हाट्सएप कॉल और वॉइस मैसेज
पूर्व विधायक ने कोर्ट को बताया कि उन्हें 25 और 26 मई 2026 को विदेशी नंबरों से अज्ञात व्यक्तियों के व्हाट्सएप कॉल और संदेश प्राप्त हुए। स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब महेंद्र ढालाना नामक व्यक्ति ने उन्हें एक वॉइस मैसेज भेजा। इस संदेश में झज्जर के डीघल गांव में हुए एक फाइनेंसर की हत्या की जिम्मेदारी ली गई थी। साथ ही, कुंडू को सीधी धमकी दी गई कि यदि उन्होंने रंगदारी (एक्सटॉर्शन) की रकम नहीं दी, तो उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया जाएगा। धमकियों का सिलसिला यहीं नहीं थमा; अगले ही दिन उन्हें एक और संदेश प्राप्त हुआ जिसमें लिखा था—”तैयार रहो, जल्द मिलेंगे।”
मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बलराज कुंडू ने अदालत के समक्ष अपनी वर्तमान सुरक्षा स्थिति पर असंतोष जाहिर किया है। उनका आरोप है कि सरकार द्वारा उन्हें जो सुरक्षा मुहैया कराई गई है, वह खतरे के स्तर को देखते हुए बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है। कुंडू ने कोर्ट को बताया कि उनके साथ तैनात सुरक्षाकर्मियों के पास आधुनिक हथियार (मॉडर्न वेपन्स) का अभाव है, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में उनके बचाव के लिए जरूरी हैं।
इतना ही नहीं, पूर्व विधायक ने यह भी शिकायत की कि जब वे अपने घर से बाहर निकलते हैं या गुरुग्राम जैसे अन्य शहरों की यात्रा पर जाते हैं, तो उन्हें अपने सुरक्षाकर्मियों को साथ ले जाने की अनुमति तक नहीं दी जाती है। इससे उनकी सुरक्षा और भी ज्यादा असुरक्षित हो जाती है।
सरकार का जवाब और हाई कोर्ट का रुख
इस मामले में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के समक्ष हरियाणा सरकार ने अपना पक्ष रखा। सरकार ने जानकारी दी कि वर्तमान में पूर्व विधायक बलराज कुंडू के आवास पर एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) और चार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, उन्हें तीन निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) भी प्रदान किए गए हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार के सुरक्षा प्रबंधों को रिकॉर्ड पर लिया और पूर्व विधायक की याचिका पर अपना निर्णय सुनाया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि बलराज कुंडू को सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा के अलावा अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता महसूस होती है, तो वे राज्य सरकार से इसका औपचारिक अनुरोध कर सकते हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अतिरिक्त सुरक्षा का खर्च स्वयं विधायक को ही वहन करना होगा।
यह मामला एक बार फिर से जन प्रतिनिधियों की सुरक्षा और संगठित अपराध (Organized Crime) के बढ़ते खतरों के बीच के संतुलन पर बहस को तेज करता है। बलराज कुंडू की याचिका अब इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार उनके खतरे का पुनर्मूल्यांकन किस प्रकार करती है।










