Haryana News: हरियाणा में बाढ़ सुरक्षा कार्य अधूरे, लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज

हरियाणा में मानसून की शुरुआत के बावजूद बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी हर पांचवीं परियोजना (20% कार्य) अभी भी अधूरी है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 11, 2026

Haryana News: हरियाणा में मानसून की दस्तक के साथ ही झमाझम बारिश का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन राज्य में बाढ़ सुरक्षा और जल निकासी की जमीनी तैयारियां अभी भी पूरी तरह मुकम्मल नहीं हो पाई हैं। प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी हर पांचवीं परियोजना (यानी करीब २०% कार्य) अभी भी अधूरी पड़ी है। इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए प्रदेश की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सभी लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए ३१ जुलाई तक की अंतिम समय सीमा (डेडलाइन) तय कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि काम में अनावश्यक देरी या ढिलाई बरतने वाली एजेंसियों और ठेकेदारों पर सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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८० प्रतिशत कार्य पूरे, बचे हुए कार्यों के लिए ३१ जुलाई की डेडलाइन

बाढ़ नियंत्रण को लेकर आयोजित की गई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों ने वर्तमान स्थिति का ब्यौरा साझा किया। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण से संबंधित कुल परियोजनाओं के लगभग ८० प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। वहीं, लगभग १८ प्रतिशत कार्यों पर तेजी से काम चल रहा है, जिन्हें जुलाई के अंत तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शेष बचे २ प्रतिशत कार्य ऐसे हैं, जो दोबारा निविदा जारी करने (री-टेंडरिंग) और सरकारी खरीद प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी पेचों के कारण अटके हुए हैं, जिनमें थोड़ा अतिरिक्त समय लग सकता है।

विभागीय आंकड़ों और रिपोर्ट को देखने के बाद सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने दोटूक कहा कि जनता की सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर किसी अधिकारी की लापरवाही या काम को अटकाने की मंशा सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके अलावा, जिन निर्माण एजेंसियों या ठेकेदारों ने तय समय सीमा के बावजूद काम पूरा नहीं किया है या जिन्होंने अभी तक काम शुरू भी नहीं किया है, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने और उन पर दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारियों की छुट्टियों पर लगी रोक

अंबाला और हिसार जैसे बाढ़ के प्रति बेहद संवेदनशील मंडलों की विशेष समीक्षा करते हुए श्रुति चौधरी ने अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर निरंतर निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रमुख जल निकासी व्यवस्थाओं, नदियों व नहरों के तटबंधों, भारी क्षमता वाले पंपिंग स्टेशनों तथा बाढ़ से सुरक्षा देने वाले अन्य सभी उपकरणों को चौबीसों घंटे पूरी तरह क्रियाशील और एक्टिव मोड में रखा जाए, ताकि जलभराव की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने प्रशासनिक मुस्तैदी बढ़ा दी है। जिन क्षेत्रों को बाढ़ संभावित (फ्लड प्रोन एरिया) के रूप में चिन्हित किया गया है, वहां तैनात किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को सिंचाई मंत्री की पूर्व अनुमति के बिना छुट्टी नहीं दी जाएगी। सरकार ने आदेश जारी किया है कि बाढ़ नियंत्रण से जुड़े सभी तकनीकी विशेषज्ञ, अधिकारी और कर्मचारी अनिवार्य रूप से अपने-अपने मुख्यालयों पर ही मौजूद रहेंगे। इस मुस्तैदी का मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि राज्य के किसी भी हिस्से में भारी बारिश के कारण बाढ़ या जलभराव जैसे हालात बनते हैं, तो बिना समय गंवाए तत्काल प्रभाव से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें और जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

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