Haryana News: हरियाणा में खेती होगी हाईटेक, खेत की मिट्टी का रियल टाइम टेस्ट होगा

हरियाणा सरकार खेती की उत्पादकता और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए एक बड़ी पहल करने जा रही है। इसके तहत राज्यभर में ‘ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस’ किट वितरित की जाएंगी, जिससे किसान अपने खेतों की मिट्टी की वास्तविक सेहत का सटीक और वैज्ञानिक परीक्षण कर सकेंगे।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 9, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में कृषि उत्पादकता को नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। सरकार अब खेती की सफलता की जड़ यानी मिट्टी की सेहत पर ध्यान केंद्रित कर रही है। प्रदेशभर में मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता की सटीक जांच के लिए सरकार ने ‘ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस’ किट उपलब्ध कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि आने वाले समय में कृषि की उत्पादकता केवल बीज या पानी पर नहीं, बल्कि मिट्टी में मौजूद ऑर्गेनिक कार्बन (जैविक कार्बन) की मात्रा पर निर्भर करेगी।

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2.5 करोड़ की लागत से होगी आधुनिक किटों की खरीद

मिट्टी परीक्षण को तकनीक से जोड़ने के लिए हरियाणा सरकार 332 आधुनिक ‘ऑर्गेनिक कार्बन एनालिसिस’ किट खरीदेगी। इस परियोजना पर लगभग 2.5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा की अध्यक्षता में आयोजित हाई पॉवर्ड परचेज कमेटी की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। योजना के अनुसार, इन किटों को राज्य की 106 सरकारी प्रयोगशालाओं में स्थापित किया जाएगा, जहाँ किसान अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण करवा सकेंगे।

क्यों जरूरी है ऑर्गेनिक कार्बन की जांच?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी की सेहत को मापने का सबसे प्रभावी पैमाना ‘ऑर्गेनिक कार्बन’ है। मंत्री श्याम सिंह राणा ने जानकारी दी कि किसी भी खेत की उत्पादकता के लिए मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन का स्तर 0.5 से 0.75 प्रतिशत के बीच होना अनिवार्य है, जबकि 1 प्रतिशत या उससे अधिक का स्तर ‘आदर्श’ माना जाता है। यदि यह मात्रा 0.5 प्रतिशत से कम हो जाती है, तो मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति घटने लगती है, जिससे फसलों को आवश्यक पोषण नहीं मिल पाता। ऑर्गेनिक कार्बन मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ाता है, जिससे खेत लंबे समय तक नमी बरकरार रख सकते हैं और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटाश जैसे पोषक तत्व पौधों को आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

रासायनिक खादों से मुक्ति और लागत में कमी

इस योजना का मुख्य उद्देश्य खेती को ‘लाभकारी और टिकाऊ’ बनाना है। वर्तमान में किसान रासायनिक उर्वरकों पर बहुत अधिक निर्भर हैं, जिससे न केवल मिट्टी का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, बल्कि खेती की लागत भी बढ़ रही है। सरकार का लक्ष्य है कि मिट्टी की जांच के माध्यम से किसान यह जान सकें कि उनकी जमीन को वास्तव में किस तत्व की आवश्यकता है। इससे अनावश्यक रासायनिक खादों का प्रयोग कम होगा और किसानों की खेती पर होने वाली लागत में भारी कमी आएगी।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास

सरकार की इस सोच के पीछे एक बड़ा आर्थिक दृष्टिकोण है। यदि किसान मिट्टी की सेहत को सुधारने में सफल होते हैं, तो वे कर्जमुक्त खेती की ओर कदम बढ़ा सकेंगे। भविष्य में हरियाणा का किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो और राज्य की भूमि सदियों तक उपजाऊ बनी रहे, इसी दूरदर्शी लक्ष्य के साथ सरकार ने यह कदम उठाया है। यह ‘लाइव टेस्ट’ तकनीक किसानों को उनकी जमीन की वास्तविक स्थिति के बारे में सटीक जानकारी देगी, जिससे वे वैज्ञानिक तरीके से अपनी फसल का चयन और पोषण प्रबंधन कर पाएंगे।

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