Haryana News: पंजाब और हरियाणा के बीच स्थित खनौरी (दातासिंह वाला) बॉर्डर पर दिल्ली कूच के लिए अड़े किसानों और जींद जिला प्रशासन के बीच चल रहा गतिरोध और गहरा गया है। प्रशासन और किसानों के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच रविवार को कई घंटों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता के बाद स्थिति जस की तस बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच हुई तीन दौर की वार्ता पूरी तरह से विफल हो गई है, जिसके चलते किसानों ने अब बॉर्डर पर ही अपना डेरा पूरी तरह मजबूत कर लिया है।
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खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर किसान
वार्ता विफल होने के बाद किसान संगठनों ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। कड़ाके की ठंड या खुले आसमान की परवाह किए बिना किसानों ने साफ कह दिया है कि वे अपनी दिल्ली कूच की जिद पर अडिग हैं। प्रशासन के तमाम प्रयासों और समझाने के बावजूद किसानों ने आज की पूरी रात बॉर्डर पर खुले आसमान के नीचे तारों की छांव में ही बिताने का निर्णय लिया है। किसानों का यह संकल्प उनके आंदोलन की दृढ़ता को साफ तौर पर दर्शाता है।
केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत की मांग
प्रशासन द्वारा किसानों के सामने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक करने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने सिरे से खारिज कर दिया। इस संबंध में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने मीडिया से खुलकर बात की और सरकार के प्रस्ताव को ठुकराने की वजह बताई।
डल्लेवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री स्तर की बैठक से इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के मुद्दों का समाधान निकलना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया:
“हरियाणा के मुख्यमंत्री केवल राज्य स्तर के मामलों और सीमाओं तक सीमित हैं।”
“किसानों की मुख्य समस्याएं और मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।”
“हमारा विरोध केंद्र सरकार की व्यापारिक नीतियों, ट्रेड डील और कृषि से जुड़ी केंद्रीय नीतियों के खिलाफ है।”
यही वजह है कि किसान नेता केवल राज्य के मुखिया के बजाय केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ सीधे और ठोस स्तर की बातचीत चाहते हैं।
शांतिपूर्ण मोर्चा रहेगा जारी
बैठक के दौरान जिला प्रशासन की ओर से किसानों के सामने कुछ विकल्प रखे गए थे। प्रशासन ने किसानों से अपील की थी कि वे अपनी संख्या कम करके आगे बढ़ें या फिर राज्य के मुख्यमंत्री के साथ वार्ता का रास्ता चुनें। हालांकि, किसान मोर्चे ने सर्वसम्मति से प्रशासन के इन सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया।
किसान नेताओं का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक, सीधी और ठोस बातचीत का बुलावा नहीं आता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण मोर्चा इसी तरह खनौरी बॉर्डर पर डटा रहेगा। प्रशासन और किसानों के बीच तनातनी को देखते हुए सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम अब भी बरकरार हैं, और आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक तूल पकड़ सकता है।
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