Haryana News: आयुष्मान योजना पर संकट के बादल, बकाया भुगतान न मिलने से IMA ने लिया बड़ा फैसला

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों का बकाया भुगतान लंबे समय से लंबित होने पर कड़ा रुख अपनाया है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 1, 2026

Haryana News: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत योजना’ के लाभार्थियों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अस्पतालों के अटके हुए बकाया भुगतान को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। आईएमए ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि लंबित भुगतान का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के निजी अस्पताल 5 जून से आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों का इलाज बंद कर देंगे। इस निर्णय के अमल में आने से स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव पड़ सकता है और हजारों गरीब मरीजों को सीधे तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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भुगतान में देरी से अस्पताल संचालक परेशान

रोहतक जिले का उदाहरण लें तो यहां करीब 34 निजी अस्पताल इस योजना से जुड़े हुए हैं, जो पिछले काफी समय से भुगतान के संकट से जूझ रहे हैं। आईएमए पदाधिकारियों के अनुसार, कई अस्पतालों का करोड़ों रुपये का भुगतान सरकारी स्तर पर एक साल से अधिक समय से फंसा हुआ है। इस वित्तीय संकट के कारण अस्पतालों का संचालन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि वे इस स्थिति में नहीं हैं कि अपने संसाधनों से इलाज का खर्च लगातार उठाते रहें।

सरकार के साथ विफल वार्ता और उपजे हालात

आईएमए के प्रतिनिधियों ने बताया कि भुगतान के मुद्दे पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत के कई दौर हो चुके हैं। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद, धरातल पर भुगतान की स्थिति जस की तस बनी हुई है। आईएमए का तर्क है कि वे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन लंबे समय से फंड रुकने के कारण अब उनके पास अस्पतालों के दैनिक खर्चे चलाने का कोई रास्ता नहीं बचा है।

कर्मचारियों का वेतन, जीवनरक्षक दवाइयों की खरीद, बिजली बिल और मेंटेनेंस जैसे अनिवार्य खर्चों को पूरा करने में अस्पताल असमर्थ हो गए हैं। यही कारण है कि मजबूरन उन्हें 5 जून से सेवा रोकने का कठोर कदम उठाना पड़ रहा है।

मरीजों के लिए खड़ी हो सकती है बड़ी मुसीबत

यदि 5 जून से निजी अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों को भर्ती करने या इलाज देने से मना करते हैं, तो इसका सबसे बुरा असर गरीब और जरूरतमंद वर्ग पर पड़ेगा। ये वे लोग हैं जो महंगी स्वास्थ्य सेवाएं उठाने में सक्षम नहीं हैं और पूरी तरह आयुष्मान योजना पर निर्भर हैं। इलाज के अचानक बंद होने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बीच में ही उपचार छोड़ना पड़ सकता है या उन्हें सरकारी अस्पतालों की लंबी लाइनों में धक्का खाना पड़ सकता है, जहाँ पहले से ही मरीजों का भारी दबाव होता है।

समाधान की उम्मीद

आईएमए ने अभी भी सरकार से मांग की है कि स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द लंबित भुगतान जारी किए जाएं। संगठन का कहना है कि उनकी मंशा मरीजों को परेशान करने की नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने की है। अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि क्या वह 5 जून से पहले कोई ठोस कदम उठाकर इस संकट को टाल पाती है या फिर मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव का सामना करना पड़ेगा।

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