Haryana News: गेहूं के अवशेष जलाने से बढ़ी चिंता, 5 साल में सबसे ज्यादा मामले दर्ज

हरियाणा में गेहूं के फसल अवशेष जलाने के मामलों ने 5 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 2026 में अब तक 3097 मामले सामने आ चुके हैं, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा हैं।

Haryana News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 10, 2026

Haryana News: हरियाणा में इस साल गेहूं के फाने यानी फसल अवशेष जलाने के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य में 1 अप्रैल से 9 मई 2026 तक कुल 3097 मामले सामने आए हैं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं। यह आंकड़ा प्रशासन और पर्यावरण विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। पिछले साल की तुलना में इस बार मामलों में लगभग तीन गुना वृद्धि देखने को मिली है।

राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण विभाग लगातार किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई जिलों में खेतों में आग लगाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ते मामलों ने एक बार फिर पर्यावरण प्रदूषण और वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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2025 के मुकाबले कई गुना बढ़े मामले

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में इसी अवधि के दौरान केवल 1055 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या बढ़कर 3097 तक पहुंच गई है। यानी एक साल के भीतर फसल अवशेष जलाने के मामलों में करीब तीन गुना इजाफा हुआ है।

यदि पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो 2022 में कुल 2712 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद 2023 में यह संख्या घटकर 1363 रह गई थी। वर्ष 2024 में मामलों में फिर वृद्धि हुई और यह आंकड़ा 2130 तक पहुंच गया। वहीं 2025 में सबसे कम 1055 मामले सामने आए थे। अब 2026 में यह संख्या सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ चुकी है।

जींद जिला सबसे आगे

इस बार गेहूं के फाने जलाने के मामलों में जींद जिला सबसे आगे रहा है। यहां कुल 479 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके बाद रोहतक में 418 मामले सामने आए हैं। झज्जर जिले में 314 और सोनीपत में 271 मामले दर्ज किए गए हैं।

कई अन्य जिलों में भी पिछले साल की तुलना में दोगुने से अधिक मामले सामने आए हैं। प्रशासन का मानना है कि किसानों द्वारा जल्दी खेत खाली करने और अगली फसल की तैयारी के कारण फसल अवशेष जलाने की घटनाएं बढ़ी हैं।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

विशेषज्ञों के अनुसार, खेतों में फसल अवशेष जलाने से वातावरण में धुआं और जहरीली गैसें फैलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। सांस से जुड़ी बीमारियों, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी प्रभावित होती है। आग लगाने से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व और सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे खेती की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।

किसानों को जागरूक करने में जुटा प्रशासन

हरियाणा सरकार किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनों और सब्सिडी की सुविधा दे रही है। प्रशासन लगातार किसानों से अपील कर रहा है कि वे खेतों में आग न लगाएं और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करें। इसके बावजूद मामलों में लगातार बढ़ोतरी यह दिखाती है कि अभी भी जागरूकता और सख्ती की जरूरत बनी हुई है। आने वाले दिनों में प्रशासन द्वारा निगरानी और कार्रवाई और तेज की जा सकती है।

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